नीमच। जिले के मनासा में जीबीएस संक्रमण और इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के मद्देनज़र नीमच जिला प्रशासन एवं नगरपालिका पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर बुधवार को पेयजल की गुणवत्ता जांचने के लिए प्रशासनिक अमला और नगर पालिका की टीमें फील्ड में सक्रिय रहीं।

एसडीएम संजीव साहू एवं नगर पालिका की मुख्य अधिकारी (सीएमओ) दुर्गा बामनिया के नेतृत्व में जलकल एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की गहन जांच की। इस दौरान पानी के सैंपल लिए गए तथा संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

जांच अभियान के तहत सार्वजनिक स्थलों पर लगे कैंपरों की स्थिति का निरीक्षण किया गया, पेयजल सप्लाई से जुड़े वाल्वों की जांच की गई तथा शहर की पानी की टंकियों की साफ-सफाई की भी पड़ताल की गई।

एसडीएम संजीव साहू ने कहा कि शहरवासियों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने की सख्त हिदायत दी गई है।

नगरपालिका नीमच की मुख्य अधिकारी दुर्गा बामनिया ने बताया कि शहर में कुल 20 बड़ी पानी की टंकियां हैं, जिनमें से 17 की सफाई का कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष टंकियों की सफाई भी शीघ्र की जाएगी। उन्होंने बताया कि पानी सप्लाई के सभी वाल्वों को सेनेटाइज कर साफ करने के निर्देश दिए गए हैं। शहर में लगभग 250 मुख्य वाल्व और करीब एक हजार छोटे वाल्व मौजूद हैं।

अधिकारियों ने टीवीएस शोरूम चौराहा, एलआईसी चौराहा, लायंस पार्क चौराहा, टैगोर मार्ग, महू रोड पुलिया स्थित नाला, प्राइवेट बस स्टैंड सहित अन्य क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की विस्तार से जांच की।
