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January 21, 2026, 11:00 am
BIG REPORT : पूर्व महापौर-पुलिस आरक्षक का विवाद, हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, एसटीएफ करेगी मामले की जांच, आगामी सुनवाई में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट करें पेश, पढे़ खबर 

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जबलपुर। सितंबर 2025 में वाहन चेंकिग के दौरान जबलपुर में पूर्व महापौर और एक पुलिस आरक्षक के बीच जमकर विवाद हुआ। इस मामले पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने साफ कहा था कि जब थानों में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम जनता को सुरक्षा कैसे देंगे। मामले पर मंगलवार को एक बार फिर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस की कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच एसटीएफ द्बारा कराए जाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि आगामी सुनवाई जो कि 17 फरवरी को होगी, उसमें सीलबंद लिफाफे के साथ जांच रिपोर्ट पेश की जाए।


जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि पूर्व महापौर प्रभात साहू ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता की थी। कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि पूर्व महापौर के द्वारा वर्दी फाड़ने का स्पष्ट वीडियो भी वायरल होने के बावजूद उनके व समर्थकों के विरुद्ध राजनीतिक दबाव में नामजद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।


हाईकोर्ट के पूर्व निर्देश के परिपालन में मंगलवार को लार्डगंज थाना प्रभारी दोनों पक्षों की ओर से दायर कराई गई एफआईआर व केस डायरी के साथ उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि दोनों शिकायत में सही व निष्पक्ष जांच नहीं की गई है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार दोनों प्रकरणों में सही व निष्पक्ष जांच नहीं हुई है। इस अवलोकन के साथ नई व्यवस्था दे दी गई है कि अब इस मामले की जांच एसटीएफ करेगी।


यह था पूरा घटनाक्रम
जनहित याचिकाकर्ता के अनुसार पूर्व महापौर प्रभात साहू को लार्डगंज थाना अंतर्गत बल्देव बाग के समीप वाहन सितंबर 2025 को चेकिंग दौरान पुलिसकर्मी ने बिना हेलमेट पहने वाहन चलाते हुए रोका था। पूर्व महापौर अपना परिचय देते हुए पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता करने लगे। इसके कुछ ही देर बाद समर्थकों के हुजूम एकत्र हो गया। याचिका में आरोप है कि सरेराह पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल भी हुआ था। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया। पुलिसकर्मी की शिकायत पर अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है। वायरल वीडियो में आरोपितों की शिनाख्त स्पष्ट है।


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि लार्डगंज थाने में अपराध क्रमांक 525/2025 और 526/2025 की जांच तत्काल प्रभाव से एसटीएफ जबलपुर को स्थानांतरित की जाती है। कोर्ट का यह भी मानना है कि स्थानीय पुलिस पर पहले से ही पक्षपात और दबाव के आरोप लग रहे थे, ऐसे में उस एजेंसी से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती।


अदालत ने एसटीएफ को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी तथ्यों, वीडियो फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, केस डायरी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर स्वतंत्र जांच करें और अगली सुनवाई तक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करें, ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ या प्रभाव की संभावना ना रहे।


इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने याचिका पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि जब पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं तो वह आम जनता को कैसे सुरक्षा प्रदान करेंगे। कोर्ट ने लार्डगंज थाना प्रभारी को निर्देशित किया था, कि वे अगली सुनवाई में दर्ज की गई दोनों एफआईआर व केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। कोर्ट ने पूर्व महापौर व पुलिस अधीक्षक जबलपुर को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था।

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