सरवानिया महाराज। केंद्र एवं मध्य प्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री पूरक पोषण योजना के अंतर्गत विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन का संचालन स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते समूहों को न तो समय पर खाद्यान्न मिल पा रहा है और न ही लागत राशि का भुगतान किया जा रहा है। इससे योजना के संचालन में गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
महिला स्वयं सहायता समूह संगठन की प्रदेश अध्यक्ष माया मनोहर बैरागी ने बताया कि प्रदेश में लगभग 96 हजार स्वयं सहायता समूह इस योजना से जुड़े हैं, जिनमें 2 लाख 12 हजार महिला रसोइया कार्यरत हैं। इन्हें मात्र 4000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है, यानी करीब 133 रुपये प्रतिदिन, जिसमें सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक भोजन पकाने के साथ-साथ बच्चों की जूठी थालियां धोने का कार्य भी शामिल है। वहीं आंगनवाड़ी रसोइयों की स्थिति और भी दयनीय है, जिन्हें मात्र 500 रुपये मासिक, यानी लगभग 16 रुपये प्रतिदिन मानदेय मिलता है।
उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा तीन-तीन माह तक भोजन पकाने की लागत राशि जारी नहीं की जाती, ऐसे में गरीब कामकाजी महिलाएं किराना सामग्री खरीदने में असमर्थ हो जाती हैं। शासन द्वारा गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर विशेष भोजन देने के निर्देश तो जारी किए जाते हैं, लेकिन इसके लिए अलग से राशि उपलब्ध नहीं कराई जाती, जबकि विशेष भोजन की लागत काफी अधिक होती है।
समूह संचालकों के सामने यह गंभीर संकट है कि बिना खाद्यान्न और भुगतान के वे 26 जनवरी को विशेष भोजन कैसे उपलब्ध कराएं। संगठन ने शासन और विभाग से मांग की है कि प्रति माह समय पर भोजन पकाने की लागत राशि और विद्यालयों में दर्ज छात्र संख्या के अनुसार खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए, ताकि योजना का संचालन सुचारू रूप से हो सके। उक्त जानकारी महिला स्वयं सहायता समूह संगठन की प्रदेश प्रवक्ता सोना भरत प्रजापत अठाना ने दी।