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April 15, 2026, 10:47 am
KHABAR : मिट्टी, आकाश और चिता केन नदी में आदिवासियों का भूख हड़ताल के दूसरे दिन मिट्टी सत्याग्रह से हिला प्रशासन, पढे़ भरत यादव की खबर 

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छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों का धैर्य आज जवाब दे गया। आंदोलन के 9वें दिन और सामूहिक भूख हड़ताल के 48वें घंटे में प्रवेश करते ही, श्चिता आंदोलन ने श्मिट्टी सत्याग्रह का रौद्र रूप धारण कर लिया है। आज सुबह हजारों आदिवासियों नेकृजिनमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे। केन नदी की गीली मिट्टी को अपने पूरे शरीर पर लपेट लिया और जल, जंगल, जमीन के नारों के साथ जलधारा में मोर्चा संभाल लिया।


मिट्टी सत्याग्रह आंदोलनकारियों ने शरीर पर मिट्टी मलकर यह संदेश दिया कि वे इस जमीन के मूल मालिक हैं। बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा, ष्अगर हमें हमारी जमीन से हमें बिना न्याय दिए बेदखल किया गया, तो हम इसी मिट्टी में दफन होना पसंद करेंगे।


आकाश सत्याग्रह तपती धूप और खुले आसमान के नीचे, बिना अन्न ग्रहण किए हजारों विस्थापितों ने जमीन पर लेटकर आकाश सत्याग्रह जारी रखा। भूख की वजह से कई महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के परिवार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया उनके निजी शैक्षणिक संस्थानों को नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने की बात भी की जा रही है इस संबंध में आज अमित के परिजनों ने प्रेस वार्ता कर अपनी बात रखी कि किस प्रकार जिला प्रशासन उनपर अनावश्यक दबाव बनाकर प्रताड़ित कर रहा जबकि अमित ने स्पष्ट किया है कि वह आदिवासियों के हक अधिकार के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे। 


आंदोलन में आज 9वें दिन प्रशासन की चुप्पी ने साबित कर दिया है कि उन्हें गरीब आदिवासियों की जान की कोई कीमत नहीं है। हमारे  चूल्हे 48 घंटों से ठंडे हैं। यह मिट्टी सत्याग्रह उस तानाशाही के खिलाफ है जो नियम और कानूनों (धारा 11, 15, 18) को ताक पर रखकर हमें उजाड़ना चाहती है। यदि आज रात तक किसी उच्चाधिकारी ने ठोस कार्यवाही/निर्णय नहीं दिया, तो यह आंदोलन और उग्र हो जाएगा।


 

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