चित्तौड़गढ़। राष्ट्रीय एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश मान सिंह चूण्डावत, सचिव सुनील कुमार गोयल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चित्तौड़गढ़, अटल सिंह चांपावत अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या 01 एवं संतोष कुमार बैरवा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा संयुक्त रूप से अप्रेल माह में दिनांक 19.04.2026 को अक्षय तृतीया एवं मई माह में दिनांक 31.05.2026 को पीपल पूर्णिमा के अवसर पर चितौड़गढ़ क्षेत्र में होने वाले बाल विवाहों की रोकथाम हेतु पोस्टर जारी किए गए हैं। सचिव गोयल ने बताया कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत एक दंडनीय अपराध भी है। बाल विवाह करने या उसमें सहायता करने वाले (माता-पिता, पंडित, टेंट व्यवसायी, हलवाई, और बैंड-बाजा दल) को 2 वर्ष तक के कठोर कारावास और ₹1 लाख तक के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक विकास को अवरुद्ध करता है। यह उनके सुनहरे भविष्य और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। हम सभी का दायित्व है कि हम अपने आस-पास ऐसे किसी भी आयोजन को रोकें और प्रशासन का सहयोग करें। सचिव महोदय ने बताया कि बाल विवाह की रोकथाम हेतु सम्पूर्ण चित्तौड़ क्षेत्र में पीएलवी के माध्यम से विधिक जागरूकता शिविर आयोजित करवाये जा रहें क्योंकि अक्षय तृतीया एवं पीपल पूर्णिमा के अवसर पर क्षेत्र में भारी संख्या में बाल विवाह होते हैं जिनकी रोकथाम हेतु एवं लोगो को बाल विवाह के दुष्प्रभावों से आमजन को अवगत कराने के लिए ही यह पोस्टर जारी किए गए हैं। यदि किसी भी व्यक्ति को क्षेत्र में हो रहे बाल विवाह की जानकारी मिलती है तो वह इसकी शिकायत 181 कॉल सेंटर, पुलिस नियंत्रण कक्ष के 100 नम्बर पर एवं नालसा हेल्पलाईन नं. 15100 पर कर सकता है अथवा प्राधिकरण के हेल्पलाईन नं. 8306002112 पर सूचना दे सकता है अथवा प्राधिकरण के कार्यालय में उपस्थित होकर भी बाल विवाह के बारे में सूचना दे सकता है।