खरगोन। मातृ एवं शिशु मृत्यू दर कम करने के लिए जननी सुरक्षा, आकांक्षी योजना सहित कई अन्य तरह की सुविधाओं के दावों के बीच इस भीषण गर्मी के माहौल में जच्चा-बच्चा के लिए जिला अस्पताल में बेड तक मुहैया नहीं हैं। हालात यह हैं कि प्रसूताओं को अपने नवजात शिशुओं के साथ फर्श पर सोना पड़ रहा है। जिला अस्पताल की इन व्यवस्थाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकासखंड स्तर पर जननी को किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
शुक्रवार को जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड की गैलरी और कक्षों में प्रसूताएं अपने नवजात बच्चों के साथ फर्श पर लेटी नजर आईं। एक दो नहीं बल्कि 30 जननियों को बेड उपलब्ध न होने के कारण फर्श पर गद्दा डालकर लिटाया गया था। प्रसूताएं ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों से आईं गरीब मध्यम वर्गीय परिवारों की थीं। गौरतलब है कि संपन्न परिवारों की महिलाएं निजी अस्पतालों में जाती हैं पर यहां गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाएं ही आती हैं। जननियों ने बताया कि प्रसव के बाद उन्हें नीचे गद्दे डालकर लिटा दिया गया।
70 बेड, 130 महिलाएं भर्ती
अस्पताल के स्टॉफ ने बताया कि मेटरनिटी वार्ड में 70 बेड है, जबकि अस्पताल में 130 महिलाएं भर्ती है। 100 महिलाओं के लिए बेड की व्यवस्था कराई जा सकती, जबकि 30 फर्श पर ही लेटना पड़ेगा। इससे प्रसूताओं से अटैंडरों ने भी नाराजगी जताई। प्रसूता मनीषा, निरमा, पायल आदि ने बताया जिस बरामद में प्रसतूओं को लेटाया गया, उस बरामदे में पंखा-कूलर की व्यवस्था भी नही की गई। परिजनों ने बताया जिस फर्श पर प्रसूता और बच्चे को लेटाया गया, वहां जूता-चप्पल पहने हुए लोगों की आवाजाही के कारण जननी और नवजात को संक्रमण का खतरा बना रहता है।