मुंबई। सामाजिक मुद्दों पर आधारित नई डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘हूं, अमल (आई पॉपी)’ इन दिनों लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म का निर्देशन विवेक चौधरी ने किया है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत और प्रभावशाली सिनेमाई भाषा का उपयोग किया है।
यह डॉक्यूमेंट्री समकालीन समाज में बदलते मानवीय संबंधों, पहचान और संवेदनशीलता जैसे विषयों को गहराई से प्रस्तुत करती है। फिल्म में एक किसान परिवार की कहानी को प्रमुखता से दिखाया गया है, जिसमें वरदी बाई मेघवाल और उनके परिवार के साथ देऊ मेघवाल तथा मांगीलाल मेघवाल (किसान-पुत्र शिक्षक) के जीवन और संघर्ष को संवेदनशील तरीके से चित्रित किया गया है।
फिल्म का मुख्य विषय अफीम (ओपियम) के लाइसेंसिंग सिस्टम से जुड़ा भ्रष्टाचार और उससे उत्पन्न शोषण के पहलू हैं। इसमें यह दिखाया गया है कि किस प्रकार अफीम का पूरा मूल्य किसानों तक नहीं पहुंच पाता, जिससे छोटे किसान और मजदूर परिवार जटिल नियमों, प्रशासनिक दबाव और कथित भ्रष्ट तंत्र के बीच संघर्ष करने को मजबूर होते हैं। मेघवाल परिवार के अनुभवों के माध्यम से यह भी सामने आता है कि लाइसेंस प्राप्त करने और उसे बनाए रखने की प्रक्रिया कई बार असमानता, दबाव और अन्याय को जन्म देती है, जिसका सीधा असर उनके जीवन और आजीविका पर पड़ता है।
इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। इसे कनाडा, कोरिया और बुडापेस्ट में पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड सहित कई देशों के फिल्म समारोहों में इसका चयन भी हुआ है। फिल्म का लंदन के सिनेमाघरों में प्रदर्शन भी हो चुका है, जहां इसे दर्शकों से अच्छा प्रतिसाद मिला है।
हाल ही में इस डॉक्यूमेंट्री का भारत में प्रीमियर मुंबई में आयोजित किया गया, जहां हाउसफुल स्क्रीनिंग के दौरान बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। इस अवसर पर मेघवाल परिवार भी फिल्म की टीम के साथ उपस्थित रहा, जिससे आयोजन भावनात्मक रूप से और भी खास बन गया।
फिल्म निर्माताओं के अनुसार ‘हूं, अमल (आई पॉपी)’ का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता फैलाना भी है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह डॉक्यूमेंट्री समाज में व्यापक चर्चा को जन्म देगी और नए दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करेगी।