सरवानिया महाराज। कभी बेहतर परिणामों के लिए पहचान रखने वाला शासकीय हाई स्कूल लासूर इन दिनों अपने कमजोर परीक्षा परिणामों को लेकर चर्चा में है। पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद कक्षा 10वीं का परिणाम निराशाजनक रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्कूल में कक्षा 10वीं में कुल 36 विद्यार्थियों का नामांकन था, जिनमें से 10 विद्यार्थियों को कम उपस्थिति के कारण प्राइवेट कर दिया गया। शेष 26 नियमित विद्यार्थियों में से 23 ही परीक्षा में उत्तीर्ण हो सके। जिले की मेरिट सूची में स्कूल का स्थान 79वां रहा।
कम छात्र, ज्यादा शिक्षक
स्कूल में कुल 9 शिक्षक पदस्थ हैं, जबकि नियमित विद्यार्थियों की संख्या 26 रही। इस हिसाब से लगभग तीन विद्यार्थियों पर एक शिक्षक की उपलब्धता है, इसके बावजूद परिणाम संतोषजनक नहीं रहा।
खर्च अधिक, परिणाम कम
प्रति विद्यार्थी सरकारी व्यय अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद परिणामों का स्तर कमजोर रहना शिक्षा प्रणाली और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
9वीं के परिणाम पर नोटिस, कार्रवाई लंबित
पूर्व में कक्षा 9वीं के परीक्षा परिणाम भी कमजोर रहने पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्राचार्य को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
कंप्यूटर शिक्षा पर भी सवाल
सूत्रों के अनुसार स्कूल में कंप्यूटर शिक्षा के लिए संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद विद्यार्थियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में निगरानी और सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
प्राचार्य का पक्ष
प्रभारी प्राचार्य सत्यनारायण पाटीदार के अनुसार कक्षा 10वीं में 36 में से 10 विद्यार्थियों को प्राइवेट किया गया था। शेष 26 में से 23 छात्र उत्तीर्ण हुए, जबकि प्राइवेट विद्यार्थियों में 8 असफल रहे।
आवश्यकता सुधार की
शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की घटती संख्या को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन से सुधारात्मक कदम उठाने की अपेक्षा की जा रही है।