मंदसौर। गांधी सागर अभयारण्य से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है। यहां रह रहे दो चीतों ‘प्रभास’ और ‘पावक’ ने अपने नए आवास में एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, इन दोनों चीतों को 20 अप्रैल 2025 को राज्य सरकार के चीता प्रोजेक्ट के तहत अभयारण्य में छोड़ा गया था। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में जैव विविधता को बढ़ावा देना और वन्यजीवों के पुनर्वास को मजबूत करना था।
पिछले एक साल में दोनों चीतों ने नए वातावरण में खुद को अच्छी तरह ढाल लिया है। वन विभाग के अनुसार ‘प्रभास’ और ‘पावक’ पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी गतिविधियां सामान्य रूप से देखी जा रही हैं।
चीतों की सुरक्षा और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। जीपीएस कॉलर और ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से उनके मूवमेंट, खान-पान और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में अन्य पुनर्वास परियोजनाओं को भी नई दिशा मिलेगी।
वन विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में ये चीते यहां स्थायी रूप से बसेंगे और गांधी सागर अभयारण्य चीतों के लिए एक सुरक्षित आवास के रूप में विकसित होगा।