नीमच। जिले के प्रमुख स्टेट हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्गों की बदहाल स्थिति और लगातार हो रहे सड़क हादसों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इन “मौत के गलियारों” के लिए जिम्मेदार कौन है?
उच्चतम न्यायालय द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए स्पष्ट निर्देश और समय-सीमा तय किए जाने के बावजूद, नीमच जिले में स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
जिले के नयागांव-लेवड़, नीमच-झालावाड़ और नीमच-सिंगोली मार्गों पर कई वर्षों से ब्लैक स्पॉट चिन्हित होने के बावजूद आज तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
सड़क निर्माण और रखरखाव कार्यों में लापरवाही, नियमों की अनदेखी और अतिक्रमण की समस्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। राजमार्गों के दोनों ओर अवैध पक्के निर्माण, बिना लाइसेंस संचालित ढाबे और होटलों की भरमार ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया है। नियमों के अनुसार इन प्रतिष्ठानों के लिए विभिन्न विभागों की एनओसी और लाइसेंस आवश्यक होते हैं, लेकिन अधिकांश जगह इसका पालन नहीं हो रहा।
इसके अलावा, राजमार्गों पर बड़े वाहनों की अनियमित पार्किंग, पिकअप और ट्रैक्टरों का बेहिसाब आवागमन तथा टू-व्हीलर के लिए अलग लेन की अनुपस्थिति भी दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। ब्लैक स्पॉट पर ओवरब्रिज निर्माण जैसी महत्वपूर्ण जरूरतें भी लंबे समय से लंबित हैं।
आपात स्थिति के लिए एम्बुलेंस और क्रेन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं, केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सहायता से निर्मित बी-श्रेणी ट्रॉमा सेंटर, नीमच भवन तैयार होने और उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद एक दशक से शुरू नहीं हो पाया है। चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति न होने के कारण इसका उपयोग ही नहीं हो सका।
पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि यदि विभागों के बीच समन्वय स्थापित करें तो इन “मौत के मार्गों” को सुरक्षित बनाया जा सकता है और आम जनता को राहत मिल सकती है।
उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें और हादसों को रोकने में प्रशासन का सहयोग करें।