नीमच। शहर में नवनिर्मित श्री आदिनाथ जिनालय में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव अत्यंत भव्यता, श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। श्री आदिनाथ जिनालय एवं जिन कुशल सूरी खतरगच्छ ट्रस्ट, नीमच के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में गच्छाधिपति आचार्य भगवंत के पावन सानिध्य ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
दादावाड़ी ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुभ मुहूर्त में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। मूलनायक भगवान आदिनाथ की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होते ही पूरा परिसर “जय आदिनाथ” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की आस्था एवं उत्साह देखते ही बन रहा था।
कार्यक्रम में परम पूज्य आचार्य भगवंत जिन मणि प्रभ सुरिश्वर जी एवं परम पूज्य विद्युत प्रभा श्री जी सहित साधु-साध्वी भगवंतों की पावन उपस्थिति रही, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।
जिनालय में भगवान आदिनाथ के साथ शंखेश्वर पार्श्वनाथ, नाकोड़ा पार्श्वनाथ, महावीर स्वामी, गौतम स्वामी, पद्मावती माता, चक्रेश्वरी माता एवं नाकोड़ा भैरव की प्रतिमाओं की स्थापना की गई। वहीं दादावाड़ी में चारों दादा गुरुदेव- जिनदत्त सुरीश्वरजी, मणिधारी दादा, जिन कुशल सूरी जी एवं जिनचंद सूरी जी की प्रतिमाएं विराजित की गईं। साथ ही काल भैरव एवं गोरा भैरव की प्रतिमाओं की भी स्थापना हुई।
नवकारसी के पश्चात मानक स्तंभ उद्घाटन एवं तोरण विधान जैसे मांगलिक कार्यक्रमों के साथ पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला जारी रही। जिनालय परिसर में निर्मित सभा मंडप, गुरु मंदिर, आराधना भवन एवं प्रवचन कक्ष भविष्य में धर्म एवं संस्कृति के केंद्र के रूप में विकसित होंगे।
इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम यादगार बन गया। उल्लेखनीय है कि 25 अप्रैल को द्वार उद्घाटन एवं दादा गुरुदेव की पूजा के साथ महोत्सव का अगला चरण आयोजित किया जाएगा।