चित्तौड़गढ़। मेवाड़ के प्रसिद्ध आस्था धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में इस बार भक्ति ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि महज 29 दिनों में ही मंदिर के भंडार में 41 करोड़ से अधिक की ऐतिहासिक राशि जमा हो गई। एक ओर जहां चढ़ावे ने नया कीर्तिमान बनाया, वहीं बढ़ती भीड़ और व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने दर्शन और भोग प्रणाली में बड़े बदलाव भी लागू कर दिए हैं। अब भक्तों को खाली हाथ दर्शन करना होगा, जबकि भेंट केवल नकद या सोना-चांदी के रूप में ही स्वीकार की जाएगी।
चतुर्दशी पर खुला था भंडार, सात चरणों में हुई गिनती-
एडीएम एवं मंदिर मंडल की सीईओ प्रभा गौतम ने बताया कि 16 अप्रैल को चतुर्दशी के दिन मंदिर का भंडार खोला गया, जिसके बाद सात चरणों में गणना की गई। इस दौरान केवल भंडार से ही 33 करोड़ 21 लाख 63 हजार 539 रुपए प्राप्त हुए। वहीं भेंटकक्ष और ऑनलाइन माध्यम से 8 करोड़ 45 लाख 75 हजार 30 रुपए की राशि मिली।
660 ग्राम सोना और 84 किलो चांदी प्राप्त-
इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं ने सोना-चांदी की भी बड़ी मात्रा में भेंट चढ़ाई। अंतिम गणना के दौरान कुल 660 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना और 84 किलो 620 ग्राम चांदी प्राप्त हुई, जिसकी अनुमानित कीमत क्रमशः लगभग 1 करोड़ और 2 करोड़ रुपए आंकी गई है। साथ ही विदेशी मुद्रा और चेक भी बड़ी मात्रा में प्राप्त हुए हैं, जिनकी प्रक्रिया अलग से की जा रही है।
सात चरणों में हुई भंडार की गणना-
16 अप्रैल- भंडार खोला गया, पहले दिन 11.11 करोड़ रुपए की गिनती
18 अप्रैल- दूसरे राउंड में 6.51 करोड़ रुपए
20 अप्रैल- तीसरे चरण में 9.60 करोड़ रुपए
21 अप्रैल- चौथे चरण में 3.78 करोड़ रुपए
22 अप्रैल- पांचवें चरण में 1.31 करोड़ रुपए
23 अप्रैल- छठे चरण में 54.06 लाख रुपए
24 अप्रैल- सातवें चरण में 34.51 लाख रुपए
पुराने रिकॉर्ड भी पीछे छूटे-
मंदिर प्रशासन के अनुसार इससे पहले अप्रैल 2025 में एक महीने में करीब 25 करोड़ रुपए का चढ़ावा प्राप्त हुआ था। वहीं नवंबर 2025 में दो महीने (21 सितंबर से 18 नवंबर) के दौरान 51.27 करोड़ रुपए का चढ़ावा मिला था, जो अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड है।
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दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव-
मंदिर में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था में अहम बदलाव किए हैं। अब मंदिर में मोरपंख और 56 भोग चढ़ाने की परंपरा को बंद कर दिया गया है। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए खाली हाथ ही मंदिर में प्रवेश करना होगा, जबकि भेंट के रूप में नकद राशि या सोना-चांदी ही स्वीकार की जाएगी।
भक्तों की सुविधा के लिए बदली व्यवस्था-
मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव के अनुसार, भोग चढ़ाने के दौरान श्रद्धालु लंबे समय तक गर्भगृह के सामने रुकते थे, जिससे कतारें बढ़ जाती थीं और अन्य भक्तों को असुविधा होती थी। विशेष रूप से 56 भोग लगाने में काफी समय लगता था, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
भीड़, अव्यवस्था और नकली सामग्री बनी वजह
प्रशासन ने बताया कि हाल के समय में श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। इसके साथ ही नकली मावे से बनी मिठाइयां, कृत्रिम फूल और नकली मोरपंख के उपयोग की शिकायतें भी सामने आई थीं। इन कारणों से व्यवस्था और धार्मिक गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही थीं, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। इसके अलावा मंदिर परिसर में फोटो-वीडियो बनाने और गाजे-बाजे के साथ घूमने जैसी गतिविधियों से भी अव्यवस्था बढ़ रही थी, जिस पर अब रोक लगाई गई है।