निंबाहेड़ा। मेवाड़ की सरज़मीं पर सूफियाना परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हजरत रोशन अली बावा साहब रहमतुल्लाह अलैहे के 65वें सद्भावना उर्स के तीसरे दिन जुमेरात रात को दरगाह परिसर में रूहानी माहौल देखने को मिला। महफिल-ए-कव्वाली ने अकीदतमंदों को भक्ति और मोहब्बत के एहसास से सराबोर कर दिया।
दरगाह बनी दुआओं का केंद्र-
शाम ढलते ही अकीदतमंदों और पत्रकारों ने दरगाह शरीफ में हाजिरी देकर अकीदत के फूल पेश किए तथा देश में अमन, चौन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगी।
मेवाड़ी परंपरा से हुआ सम्मान-
उर्स कमेटी द्वारा मेहमानों का स्वागत मेवाड़ी परंपरा अनुसार साफा, गुलपोशी एवं दस्तारबंदी के साथ किया गया, जिसने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की।
कव्वाली ने बांधा समा-
दिल्ली के मशहूर कव्वाल आमिल आरिफ साबरी एवं उनकी टीम ने सूफियाना कलाम प्रस्तुत कर समा बांध दिया। “अल मदद गोस-ए-आजम” और अन्य कलामों ने माहौल को रूहानी बना दिया।
सूफी पैगाम का संदेश-
कार्यक्रम में सूफी परंपरा के माध्यम से मोहब्बत, एकता और इंसानियत का संदेश दिया गया। रोशन अली बावा साहब का उर्स समाज में भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक बताया गया।
अकीदतमंदों की रही भारी मौजूदगी-
उर्स कमेटी एवं रोशन अली बावा साहब सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बड़ी संख्या में अकीदतमंदों की मौजूदगी ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी।