चित्तौड़गढ़। समाज में संस्कार, सामाजिक समरसता एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यरत श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन, चित्तौड़गढ़ द्वारा “सशक्तिकरण व सेवा” विषय पर राजकीय कार्मिकों की एक दिवसीय कार्यशाला एवं स्नेह मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों में कार्यरत राज्य एवं केंद्र सेवाओं के अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित चयनित अभ्यर्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे श्री क्षत्रिय युवक संघ के केंद्रीय कार्यकारी गंगा सिंह सजियाली द्वारा पूज्य श्री तन सिंह जी के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर किया गया। प्रारंभिक सत्र में पंजीयन एवं परिचय के पश्चात उपस्थित कार्मिकों ने समाज के सशक्तिकरण में अपनी भूमिका एवं योगदान पर विचार साझा किए। विभिन्न विभागों से आए अधिकारियों-कर्मचारियों ने शिक्षा, सामाजिक समरसता, युवा मार्गदर्शन तथा संस्कार निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव एवं सुझाव प्रस्तुत किए।
दोपहर के भोजन के पश्चात आयोजित द्वितीय सत्र में रेवंत सिंह पाटोदा ने श्री क्षत्रिय युवक संघ एवं उसके आनुषंगिक संगठनों की कार्यप्रणाली का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने समाज में व्याप्त विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु संगठित प्रयासों, कार्ययोजना तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा में प्रेरित करने के उपायों पर प्रकाश डाला। उनके वक्तव्य ने उपस्थित कार्मिकों को समाज सेवा एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के तृतीय एवं अंतिम सत्र में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद का आयोजन किया गया। इस संवाद में स्थानीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, जिला महामंत्री हर्षवर्धन सिंह रूद, पूर्व जिला प्रमुख भूपेंद्र सिंह बड़ौली, गंगरार प्रधान प्रतिनिधि रविंद्र सिंह चोंगावाड़ी, पूर्व प्रधान शक्ति सिंह मुरलिया, पूर्व प्रधान प्रवीण सिंह ओरड़ी, कृष्णपाल सिंह ब्यावर एवं लक्ष्मण सिंह बड़ौली सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस दौरान अधिकारियों-कर्मचारियों ने क्षेत्रीय विकास, प्रशासनिक सुधार एवं सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए जनप्रतिनिधियों के साथ खुलकर चर्चा की।
कार्यक्रम में चित्तौड़गढ़ जिले के विभिन्न विभागों से 200 से अधिक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे, जिससे यह आयोजन अत्यंत सफल एवं प्रभावशाली रहा। कार्यक्रम का संचालन जोगेंद्र सिंह छोटा खेड़ा द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।
यह कार्यशाला न केवल राजकीय कार्मिकों के बीच आपसी समन्वय एवं संवाद को सुदृढ़ करने का मंच बनी, बल्कि समाज में संस्कार, सेवा और समरसता के मूल्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी सिद्ध हुई।