चित्तौड़गढ़। जैन श्रमण संघ के युवाचार्य महेंद्र ऋषि मसा ने कहा कि भक्ति भावना है और शक्ति पुरुषार्थ है। चित्तौड़गढ़ को शक्ति और भक्ति की नगरी कहा जाता है। वे मंगलवार सुबह मीरानगर स्थानक में आयोजित प्रवचन सभा को संबोधित कर रहे थे।
युवाचार्य ने कहा कि कर्म दो प्रकार के होते हैं- निमित्त और उपादान। जैन धर्म कर्मवाद पर आधारित है और कर्मों की निर्जरा से ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने बताया कि निर्जरा का अर्थ है कर्मों का क्षय या समाप्ति। ताप, संताप और पाप से मुक्ति पाना ही सच्चा धर्म है।
उन्होंने कहा कि जिनवाणी का श्रवण पुण्य से संभव होता है और यह संत-साध्वियों के माध्यम से श्रावक-श्राविकाओं तक पहुंचती है। इसलिए प्रवचन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि स्वाध्याय का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने आह्वान किया कि जिनवाणी को सुनने के साथ उसे जीवन में उतारना भी आवश्यक है।
युवाचार्य ने सामायिक साधना को जीवन की सुरक्षा-दीवार बताते हुए कहा कि यह मन, वचन और काया से होने वाले गलत कर्मों को रोकती है। छोटे-छोटे नियम और संकल्प लेकर भी व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।
इससे पूर्व उपप्रवर्तक कोमल मुनि ने प्रवचन में कहा कि जिस प्रकार वर्षा से धूल और गंदगी साफ हो जाती है, उसी प्रकार युवाचार्य का आगमन भी जीवन को शुद्ध करने का अवसर है। जिनवाणी सुनकर मन के विकार दूर किए जा सकते हैं।
श्री जैन दिवाकर संगठन समिति के मंत्री सुधीर जैन ने बताया कि विहार यात्रा के दौरान युवाचार्य महेंद्र ऋषि मसा, मेवाड़ उपप्रवर्तक कोमल मुनि एवं संत-साध्वियों का दल अहिंसा नगर से विहार कर मीरानगर स्थानक पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया।
प्रताप सर्किल स्थित नवनिर्मित जैन दिवाकर स्तंभ का अवलोकन कर युवाचार्य ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान के अध्यक्ष किरण डांगी ने सभी से बुधवार सुबह 6रू30 बजे मीरानगर से निकलने वाले मंगल प्रवेश जुलूस में अधिकाधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।
श्रमण संघ महामंत्री राजेश सेठिया ने बताया कि जुलूस किला रोड स्थित दिवाकर भवन पहुंचेगा, जहां प्रार्थना, नवकारसी एवं प्रवचन का आयोजन होगा। कार्यक्रम का संचालन मीरानगर संघ के मंत्री पारसमल बाबेल ने किया।