देवास। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के दावों के बीच जमीनी सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। जिले में एक मार्मिक मामला सामने आया है, जहां आत्माराम खरे नामक बुजुर्ग अपने पोते के हक के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर हैं।
बेटे-बहू के निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है।
वहीं संबल योजना की अनुग्रह सहायता राशि भी दो विभागों की खींचतान में फंसी हुई है। श्रम विभाग और नगर निगम के बीच फाइल अटकी होने के कारण बुजुर्ग कई बार चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
उम्र और आर्थिक कमजोरी के बावजूद मदद के लिए भटकना उनकी मजबूरी बन गया है। आखिरकार थक-हारकर बुजुर्ग ने जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने अपनी समस्या रखी, जहां अधिकारियों ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार सिस्टम जागेगा या फिर एक बुजुर्ग यूं ही दफ्तरों के चक्कर काटता रहेगा?