चित्तौड़गढ़। भारतीय सनातन संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के कौशल विकास के उद्देश्यों को समर्पित 'गुरु पूर्णिमा विशेष सम्मान एवं पाथेय कार्यक्रम' का आयोजन बिरला शिक्षा केंद्र, माधवनगर में हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का ध्येय वाक्य "सा विद्या या विमुक्तये - संस्कार से संस्कृति, संस्कृति से राष्ट्र" रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन एवं गुरु वंदना के साथ हुआ। विद्यालय की प्राचार्या रेखा यादव ने स्वागत उद्बोधन में गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा में नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों के समावेश की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण 'कला पाथेय एवं संवाद' सत्र में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने विद्यार्थियों एवं कला प्रेमियों का मार्गदर्शन किया। सवाई माधोपुर से पधारे प्रख्यात वाइल्डलाइफ चित्रकार विजय कुमावत ने वन्यजीवों एवं प्रकृति को यथार्थवादी शैली में चित्रित करने के अपने अनुभव साझा करते हुए प्रकाश एवं छाया के संतुलन की महत्ता बताई। उनका परिचय कक्षा 8वीं 'सी' की छात्रा खुशी टेलर ने प्रस्तुत किया।
वहीं, बूंदी कला शैली के मूर्धन्य कलाकार सुनील कुमार जांगिड़ ने बूंदी शैली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सूक्ष्म रेखांकन एवं प्रकृति के सजीव चित्रण की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह शैली अपने जीवंत रंगों एवं पारंपरिक लघु चित्रकला के माध्यम से भारतीय संस्कृति के वैभव को अभिव्यक्त करती है। उनका परिचय कक्षा 8वीं 'सी' की छात्रा दांशी सुथार ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण 'विद्यार्थी-कलाकार संवाद' सत्र रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने चित्रकला, वन्यजीव संरक्षण एवं जीवन में कला के महत्व से जुड़े प्रश्न पूछे। अतिथियों ने सरल एवं प्रेरणादायक उत्तर देकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार की ओर से दोनों प्रतिष्ठित कलाकारों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अकादमिक निदेशक संजय गुप्ता, प्राचार्या रेखा यादव, समस्त शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने किया।