मंदसौर। राष्ट्रगान के रचयिता एवं विश्वविख्यात साहित्यकार रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर कृति संस्था द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके साहित्य, शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद किया।
कृति संस्था के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर भारत की महान विभूति थे। वे शिक्षा में प्रकृति एवं खेलकूद के समावेश के समर्थक थे। इसी उद्देश्य से उन्होंने शांति निकेतन की स्थापना की, जो आज विश्वभारती विश्वविद्यालय के नाम से प्रसिद्ध है।
पारस जैन ने कोलकाता प्रवास के दिनों को याद करते हुए कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर बंगाल की साहित्य और संस्कृति में गहराई से रचे-बसे हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में संस्था पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने टैगोर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर रघुनंदन पाराशर, श्याम टांकवाल, किशोर जेवरिया, बाबूलाल गौड़, जीवन कौशिक, गणेश खंडेलवाल, माधुरी चौरसिया, डॉ. पृथ्वीसिंह वर्मा, सत्येंद्रसिंह राठौर, सत्येंद्र सक्सेना, कैलाश बाहेती, पारस जैन एवं राधेश्याम शर्मा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन संस्था सचिव रघुनन्दन पाराशर ने व्यक्त किया।