नीमच। शहर के चारों ओर बहने वाली नदी आज अपने मूल स्वरूप से दूर होकर जलकुंभी, गंदगी और अतिक्रमण की वजह से नाले में तब्दील होती नजर आ रही है। कभी जिस नदी के घाटों पर लोग स्नान करते थे, बच्चे खेलते थे और महिलाएं कपड़े धोती थीं, वही नदी अब उपेक्षा का शिकार होकर गंदे नाले का रूप ले चुकी है।
यह बात कांग्रेस नेता कमल मित्तल ने कही। उन्होंने कहा कि समय-समय पर नदी के गहरीकरण, सफाई और अतिक्रमण हटाने के दावे एवं योजनाएं बनीं, लेकिन वे कागजों से आगे नहीं बढ़ सकीं। हर वर्ष गर्मियों में इस मुद्दे पर चर्चा होती है, समाचार पत्रों में भी आवाज उठती है, लेकिन बारिश शुरू होते ही योजनाएं अधूरी रह जाती हैं और मामला अगले वर्ष तक टल जाता है।
स्थिति यह है कि बरसात के दौरान जल निकासी बाधित होने से निचले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात भी बन चुके हैं। यदि समय रहते नदी की सफाई और पुनर्जीवन का कार्य किया जाए तो शहर को जलभराव जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण और शहर की सुंदरता में भी वृद्धि होगी।
लेखक ने जिला प्रशासन, नगर प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे सामूहिक इच्छाशक्ति के साथ इस दिशा में ठोस पहल करें। यदि बरसात से पहले नदी को उसके मूल स्वरूप में लाने का कार्य शुरू किया जाए तो यह न केवल जनहित में महत्वपूर्ण कदम होगा, बल्कि शहरवासियों का वर्षों पुराना सपना भी पूरा हो सकेगा।