नीमच। धन्वन्तरी पीठम निपानिया में आयोजित गुरु सानिध्य प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन देशभर से आए 25 से अधिक वैद्यजनों को आयुर्वेद उपचार एवं औषधियों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। शिविर का मार्गदर्शन महामंडलेश्वर एवं ख्यात नाड़ी वैद्य श्री सुरेशानंद जी शास्त्री के निर्देशन में किया जा रहा है।
इस अवसर पर नीमच के प्रतिष्ठित शल्य चिकित्सक एवं आरोग्य भारती मालवा प्रांत के प्रथमोपचार प्रमुख डॉ. आशीष जोशी ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए आयुर्वेद के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान धन्वन्तरी के अवतरण से लेकर चरक एवं सुश्रुत संहिता की रचना तक का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियों को समन्वित कर बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कार्य हो रहा है, लेकिन आयुर्वेद चिकित्सकों का दायित्व है कि वे अपनी चिकित्सा पद्धति पर गर्व करें और उसी अनुसार रोगियों का उपचार करें।
डॉ. जोशी ने कहा कि चिकित्सक स्वयं अपनी पद्धति से संतुष्ट और प्रसन्न रहेगा, तभी वह रोगियों का सकारात्मक तरीके से उपचार कर सकेगा। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि हमारा रसोईघर और उसमें मौजूद मसाले सबसे बड़ा औषधि केंद्र हैं। यदि संतुलित उपयोग किया जाए तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में प्रसन्न रहना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है और यही संदेश रोगियों तक पहुंचाना चाहिए। डॉ. जोशी ने यह भी कहा कि आयुर्वेद के अध्ययन के बाद उन्हें महसूस हुआ कि वे इतने महत्वपूर्ण ज्ञान से अब तक वंचित रहे थे।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने वैद्यों की जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा सभी से आरोग्य भारती से जुड़कर स्वस्थ भारत निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में ओमप्रकाश चौधरी ने डॉ. आशीष जोशी का परिचय कराया। इस अवसर पर सुधा महावर, कैलाश बाहेती, प्रो. आशीष सोनी, नेपालसिंह सहित कई वैद्य एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।