नीमच। पुस्तक बाजार स्थित नवनिर्मित “आचार्य शांति सागर संत निलय भवन” का भव्य लोकार्पण समारोह श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। समारोह मुनि सुप्रभ सागर महाराज के सानिध्य तथा आचार्य वर्धमान सागर महाराज और सुमित सागर महाराज के निर्देशन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। इसके पश्चात शांतिनाथ विधान, प्रवचन, धर्मसभा, आहारचर्या, महाआरती एवं भक्ति संगीत सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हुए।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि स्वाध्याय, साधना और तपस्या के बिना आत्मकल्याण संभव नहीं है। साधु-संत समाज को संयम, संस्कार और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि संत निलय भवन केवल एक भवन नहीं, बल्कि समाज की श्रद्धा, सेवा और पुण्य भावना का प्रतीक है।
उल्लेखनीय है कि तीन मंजिला इस भव्य भवन का निर्माण पारंपरिक राजमहल शैली में किया गया है। भवन में सात अत्याधुनिक श्वेत मार्बलयुक्त कक्ष, विशाल सभागार, आहार रसोई, आकर्षक झरोखे, नक्काशी एवं स्वचालित लिफ्ट जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। रंग-बिरंगी रोशनी और पुष्प सज्जा से सजा भवन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
लोकार्पण अवसर पर मुनि संघ की भव्य यात्रा फोर जीरो विद्युत केंद्र से पुस्तक बाजार तक निकाली गई। जयकारों और भक्ति गीतों के बीच बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। भवन पहुंचने पर लाल पर्दा हटाकर संत निलय भवन का लोकार्पण किया गया तथा सातों कक्षों का उद्घाटन धर्मलाभार्थी परिवारों द्वारा संपन्न हुआ।
समारोह में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष विजय विनायका एवं मीडिया प्रभारी अमन विनायका ने बताया कि समाज के सामूहिक सहयोग और श्रद्धा से यह भवन मात्र 17 माह 20 दिन में तैयार किया गया है।