नीमच। जिले का चीताखेड़ा गांव इन दिनों कैंसर की भयावह त्रासदी से जूझ रहा है। गांव के एक छोटे से इलाके में लगातार सामने आ रहे कैंसर के मामलों ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि पिछले डेढ़ साल में 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 से अधिक मरीज अब भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस बीमारी की चपेट में युवा, महिलाएं और छोटे बच्चे भी आ रहे हैं। महज 200 मीटर के दायरे में बड़ी संख्या में कैंसर मरीज मिलने से पूरे गांव में भय, दहशत और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
माताजी दरवाजा से बस स्टैंड तक का क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित-
चीताखेड़ा गांव की सरपंच मंजू देवी ने बताया कि गांव के माताजी दरवाजा से बस स्टैंड तक का क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां लगातार कैंसर मरीज सामने आने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है। कई परिवार अपने परिजनों को खो चुके हैं, जबकि कई परिवार अब भी बड़े अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। अधिकांश मरीजों का इलाज अहमदाबाद सहित अन्य बड़े शहरों में चल रहा है।
कैंसर से जूझ रहे 8 लोगों की मौत-
सरपंच मंजू देवी के अनुसार कैंसर के कारण प्रभुलाल पिता नानूराम आर्य, वनिशा पिता नवीन कुमार, जेरा पति अजीज मंसूरी, रामलाल पिता भुवानीराम शर्मा, कंचनबाई पति जसराज आर्य, दुर्गादास बैरागी, राधाबाई पति रामनारायण प्रजापत तथा रतनीबाई पति अनिल गौड़ बंजारा की मौत हो चुकी है।
वर्तमान में इनका उपचार जारी-
वहीं वर्तमान में सुल्तान पिता हिसामुद्दीन शेख (40), असलम पिता मोहम्मद मंसूरी (32), दुलेसिंह पिता नानूराम बंजारा (30), कंचन कुंवर पति श्यामसिंह राजपूत (45), रेखाबाई पति तखत सिंह बसेर (45), देवीलाल पिता कन्हैयालाल नाई (60), रुखमणबाई पति नानूराम माली (65), मंजू पिता श्यामलाल सालवी (40), अंगूरबाला पति विनोद टेलर (45), किशोर पिता सालीगराम पाटीदार (40), मानु पति वीरेंद्र पाटीदार (60) तथा 4 वर्षीय गुंजन पिता अर्जुन लोहार कैंसर से पीड़ित होकर उपचाररत हैं।
जहरीले कीटनाशक और रासायनिक खाद बड़ी वजह-
ग्रामीणों का मानना है कि खेती में अंधाधुंध उपयोग किए जा रहे जहरीले कीटनाशक और रासायनिक खाद इस गंभीर बीमारी की बड़ी वजह हो सकते हैं। किसानों द्वारा बिना सुरक्षा उपकरणों के जहरीले रसायनों का छिड़काव किया जाता है, जिससे उनका असर सीधे शरीर पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से खेतों में इस्तेमाल हो रहे रसायन अब जानलेवा साबित हो रहे हैं।
जिंदगी की जंग हारी बेटी वनिशा-
मृतक बालिका वनिशा के पिता नवीन कुमार ने बताया कि मार्च 2025 में बेटी के पैर में एक गांठ हुई थी। जांच कराने पर कैंसर की पुष्टि हुई। नीमच से लेकर अहमदाबाद तक इलाज कराया गया, लेकिन बीमारी इतनी तेजी से बढ़ी कि आखिरकार उनकी बेटी जिंदगी की जंग हार गई। उन्होंने कहा कि गांव में लगातार मरीज बढ़ रहे हैं और प्रशासन को इसकी गंभीर जांच करानी चाहिए।
इलाज में सारी जमा पूंजी खत्म-
ग्रामीण महिला सुहागी बाई ने बताया कि उनकी चार वर्षीय पोती ब्लड कैंसर से पीड़ित है। हर महीने इलाज के लिए अहमदाबाद जाना पड़ता है। मजदूरी कर परिवार का गुजारा होता है, लेकिन इलाज में सारी जमा पूंजी खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि गांव में कई परिवार इसी दर्द से गुजर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम जुटा रही जानकारी-
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हुआ है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश प्रसाद ने बताया कि गांव में जांच दल गठित कर स्वास्थ्य सर्वे शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित परिवारों से जानकारी जुटा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा।
प्रभारी मंत्री ने दिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश-
वहीं प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा नीमच-मंदसौर जिले की प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया ने मामले को गंभीर बताते हुए अधिकारियों को तत्काल जांच करने और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।