चित्तौड़गढ़। ब्रह्माकुमारी संस्थान के नवदशकोत्सव के अवसर पर स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में राजयोगिनी आशा दीदी ने पारिवारिक मूल्यों एवं संस्कारों के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि परिवार मानव जीवन की प्रथम पाठशाला है, जहां प्रेम, सम्मान और सहयोग जैसे दिव्य संस्कारों का बीजारोपण होता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि कलाकार एवं समाजसेवी अपनी रचनात्मक शक्ति के माध्यम से परिवारों में मानवीय मूल्यों और दिव्य संस्कारों को सशक्त बनाएं, ताकि परिवारों में प्रेम, शांति और सौहार्द का वातावरण स्थापित हो सके।
आशा दीदी ने कहा कि महिला परिवार की धुरी होती है और उसकी मनःस्थिति का प्रभाव पूरे घर-परिवार के वातावरण पर पड़ता है। जीवन में समस्याएं आना स्वाभाविक है तथा समस्या-मुक्त जीवन संभव नहीं, लेकिन इन परिस्थितियों के बीच भी परिवार में संतुलन बनाए रखना एक महत्वपूर्ण कला है।
उन्होंने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि महिलाएं स्वयं इस कला में पारंगत हो जाएं तो वे परिवार को निश्चित रूप से सशक्त बना सकती हैं, क्योंकि परिवार के अधिकांश सदस्य अपनी आवश्यकताओं के लिए उन पर ही निर्भर रहते हैं।
कार्यक्रम में परिवार में एकता, विश्वास और आपसी प्रेम बनाए रखने का संदेश दिया गया तथा सभी से पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया गया। इसके पश्चात भगवान भोलेनाथ को भोग लगाया गया तथा सभी को प्रसाद वितरित किया गया।