ग्वालियर। न्याय और कर्मफल के देवता भगवान शनिदेव की जयंती शनिवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। इस बार शनि जयंती के साथ अमावस्या और वट सावित्री व्रत का दुर्लभ संयोग बनने से धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
शनि जयंती पर ग्वालियर के सभी शनि देव मंदिरों पर सुबह से ही सैकड़ो की संख्या मे भक्त पहुंचकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। भक्त शनिदेव भगवान को काले तिल, तेल पुष्प चढ़ाकर घर परिवार में सुख शांति लंबी उम्र की कामना कर रहे हैं, मंदिर पर आए भक्तों का कहना है कि वह शनि जयंती पर मंदिर पर आए हैं पूजा चक्र भगवान को आशीर्वाद ले रहे हैं।
ग्वालियर के बहोड़ापुर स्थित प्राचीन नवग्रह मंदिर पर पूजा अर्चना करने पहुंचे भक्तों का कहना है कि वह नवग्रह मंदिर पर शनि देव भगवान की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेने आए हैं यह प्राचीन मंदिर है जहां पर हर शनिवार अगर कोई भक्त आकर कोई भी मनोकामना मांगता है तो भगवान शनि देव प्रसन्न होकर उसकी मनोकामना पूरी कर देते हैं भगवान उसके पूरे कष्ट हर लेते हैं।
ग्वालियर का प्राचीन नवग्रह मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना है, यह मंदिर सिंधिया स्टेट पर बिछाई गई नैरोगेज ट्रेन के लिए बिछाई गई रेलवे लाइन पटरी के नजदीक बना है।
इस मंदिर पर आज शनिवार सैकड़ो की संख्या में भक्ति दर्शन करने पहुंचते हैं। यह मंदिर ग्वालियर शहर में सबसे प्राचीन मंदिर है।
ज्योतिषीय महत्व भी है आज के दिन का
ज्योतिषाचार्य रोहित उपाध्याय ने बताया कि वैदिक ज्योतिष में शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मों के अनुसार फल देने वाला ग्रह माना जाता है। शनि की चाल बदलने पर कई राशियों पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शुरू या समाप्त होता है। जिन लोगों पर शनि का प्रभाव रहता है, उन्हें जीवन में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि शनि जयंती के दिन शनि मंदिर में जाकर शनि चालीसा और शनि रक्षा स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। इससे शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में राहत मिल सकती है। कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को शनिदेव की आंखों में देखने के बजाय उनके चरणों के दर्शन करने चाहिए।
इस दिन जरूरतमंदों को काले तिल, सरसों का तेल, कंबल और दक्षिणा दान करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे करियर, व्यापार और जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।