चित्तौड़गढ़। जैन धर्म दिवाकर श्री धर्ममुनि महाराज की सुशिष्या महासाध्वी अर्पण प्रज्ञाजी मसा., जैन सिद्धांताचार्य प्रतिभाजी मसा. आदि ठाणा इन दिनों गांधीनगर स्थित श्री जैन दिवाकर स्वाध्याय संस्थान (दिवाकर भवन) में विराजित हैं।
सोमवार को आयोजित धर्मसभा में महासाध्वी अर्पण प्रज्ञाजी ने मर्यादित जीवनशैली पर विशेष उद्बोधन देते हुए कहा कि मर्यादा व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा है। मर्यादित आचरण अपनाने वाला व्यक्ति कभी पाप का भागीदार नहीं बनता। उन्होंने कहा कि मर्यादा से सम्मान प्राप्त होता है और सम्मान ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
महासाध्वी ने एक प्रसंग के माध्यम से कहा कि माता सीता द्वारा लक्ष्मण रेखा पार करने से मर्यादा भंग हुई और वे असुरक्षित हो गईं। उन्होंने बताया कि संयम और मर्यादा का मार्ग ही जीवन को सुरक्षित और संतुलित बनाता है।
महासाध्वी ने कहा कि संसार का मार्ग ऐसा है, जहां असावधानी विनाश का कारण बन सकती है, जबकि संयमित और मर्यादित आचरण जीवन को सुरक्षित दिशा प्रदान करता है।
संघ प्रवक्ता ने बताया कि महासाध्वीजी के प्रवचन प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से 9.45 बजे तक जैन दिवाकर भवन में आयोजित किए जा रहे हैं।