उज्जैन। उन्हेल स्थित राधा कृष्ण स्वर्णकार समाज मंदिर में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास बालकृष्ण गणेशदत्त जी शास्त्री ने मां की महिमा और परिवारिक मूल्यों पर भावपूर्ण प्रवचन दिया।
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा इस पृथ्वी लोक पर ही प्राप्त होती है, यह न तो बैकुंठ में होती है और न ही स्वर्ग या अन्य किसी लोक में। इसलिए मानव जीवन का उद्देश्य कथा श्रवण कर अपने जीवन को सार्थक बनाना है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा जीवन की व्यथाओं को दूर करने की शक्ति रखती है और ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान इसके माध्यम से न हो सके।
प्रवचन में शास्त्री जी ने मां की ममता का मार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि “एक मां चार-चार बेटों को पाल लेती है, लेकिन आज चार बेटे मिलकर भी एक मां की सेवा नहीं कर पाते,” जो समाज के लिए चिंता का विषय है।
इस भावुक प्रसंग के दौरान उन्होंने भजन भी प्रस्तुत किया, जिससे कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कई महिलाएं अपनी भावनाओं को रोक नहीं सकीं और उनकी आंखें नम हो गईं।
कथा में आगे उन्होंने कहा कि इस संसार में माता-पिता का स्थान सर्वाेपरि है और वर्तमान समय में पुत्रों द्वारा माता-पिता का सम्मान कम होना सत्संग की कमी का परिणाम है।
कथा के दूसरे दिन के लाभार्थी सुमनलाल सोनी, ललित सोनी और श्याम सोनी परिवार रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का श्रवण किया।