उन्हेल। राधा कृष्ण स्वर्णकार समाज मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भागवताचार्य श्री बालकृष्ण गणेशदत्त जी शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया।
कथा के दौरान उन्होंने गिरिराज धारण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब इंद्रदेव के प्रकोप से बृज में मूसलाधार वर्षा हुई, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका उंगली पर गिरिराज पर्वत को उठाकर समस्त बृजवासियों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि ईश्वर ही जीवन के सच्चे साथी हैं, जो हर संकट में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
भागवताचार्य ने रासलीला को केवल कामलीला नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन की कथा बताया। उन्होंने कहा कि जैसे दूध और पानी एक हो जाते हैं, उसी प्रकार जब भक्त अपना मन भगवान में लगा देता है तो वह ईश्वर स्वरूप हो जाता है।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन, कंस वध, उद्धव चरित्र और रुक्मणी विवाह जैसे प्रसंगों का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि जीवन में ज्ञान और प्रेम दोनों का संतुलन आवश्यक है।
इस अवसर पर गीता धर्म मंडल, मुक्तेश्वर मंडल एवं गोलोक गोशाला समिति के अध्यक्ष शिव गुरु शर्मा सहित समिति के सदस्यों ने भागवताचार्य का पुष्पमालाओं से सम्मान किया।
कथा के लाभार्थी द्वारकाधीश सोनी, हिमांशु सोनी एवं शुभांशु सोनी परिवार रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में डूबे रहे।