नीमच। श्री शिव महापुराण कथा के छठे दिवस व्यासपीठ से पंडित राजेन्द्र जी पुरोहित ने तुलसी के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि घर में तुलसी का पौधा लगाने से कष्टों का निवारण होता है। उन्होंने बताया कि तुलसी का सूखना इस बात का संकेत माना जाता है कि वह घर के कष्टों को स्वयं ग्रहण कर लेती है, जबकि हरी-भरी तुलसी सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक होती है।
कथा में शिवलिंग की महत्ता बताते हुए कहा गया कि जो व्यक्ति श्रद्धा से शिवलिंग से अपना मस्तक स्पर्श करता है, उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है। इससे उसके पापों का नाश होता है और उसका भाग्य परिवर्तित हो सकता है।
पंडित पुरोहित ने कहा कि समाज में अच्छे कार्य करने वालों को अक्सर तानों रूपी विष का सामना करना पड़ता है। यदि व्यक्ति भगवान शिव की तरह उस विष को धैर्यपूर्वक स्वीकार कर ले, तो वह अंततः शिव कृपा का पात्र बन जाता है।
कथा के दौरान भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप, उनकी कृपा तथा भगवान हनुमान के अवतार का भी सुंदर वर्णन किया गया। कथा पंडाल में हनुमानजी की आकर्षक झांकी सजाई गई, जिसे देखकर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर हो उठे। भक्तगण भजन-कीर्तन पर झूमते नजर आए और पूरा पंडाल हनुमान भक्ति में डूब गया।
इस अवसर पर बाणासुर की कथा का भी वर्णन हुआ। बताया गया कि बाणासुर ने भगवान शिव से वरदान प्राप्त कर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग शुरू कर दिया था। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव के मध्य बाणासुर को लेकर महायुद्ध हुआ। भगवान शिव की आज्ञा से श्रीकृष्ण ने मोहिनी अस्त्र का प्रयोग कर भगवान शिव को निद्रा में लीन कर दिया। सहस्त्रबाहु बाणासुर की 1000 भुजाओं में से श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से 999 भुजाएं काट दीं। जब वे उसका वध करने वाले थे, तब भगवान शिव ने अपने भक्त की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण से प्रार्थना की, जिस पर श्रीकृष्ण ने बाणासुर को क्षमादान प्रदान किया।
देवताओं के मनमोहक रूप बने आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में विभिन्न कलाकारों ने देवी-देवताओं के स्वरूप धारण कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बजरंग बली के रूप में कृष्णा विश्वकर्मा, सारांश मालवीय और एडन मालवीय, शिवजी के रूप में अभिषेक हाड़ा, यक्षित हाड़ा और सुमित मनावत, पार्वतीजी के रूप में दीपा हाड़ा, कृष्ण के रूप में अव्युक्ता घोंघड़े, सोनाली, वेदांत, शिवांश, कविश और हरि, राधा के रूप में नव्या, मनीषा और इशिका कंडारा, रुक्मिणी के रूप में कुमकुम, राम के रूप में वेदांत और प्रथम, सीता के रूप में निहारिका सिंह एवं नव्या, लक्ष्मण के रूप में सारांश तिवारी, गणपति के रूप में रिया, रिद्धि-सिद्धि के रूप में मोनिका और नैना कंडारा, माता लक्ष्मी के रूप में अविशा तथा कालिका माता के रूप में निहारिका ने शानदार प्रस्तुतियां दीं।
भक्तों के लिए रही समुचित व्यवस्था
कथा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल, बैठक व्यवस्था एवं प्रसाद वितरण की समुचित व्यवस्था की गई। सेवा कार्य में अरविंद शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, पदम सिंह राठौड़, रोहितसिंह राठौड़, राजेंद्र विश्वकर्मा, मोहित धाकड़, कृष्णा विश्वकर्मा, कपिल कंडारा, सूरज गौड़, कृष्णा कंडारा, अभिषेक हाड़ा, माधव घोंघड़े, सुमित मनावत, हर्षित मनावत, पीहू मालवीय, रानू मालवीय, अव्युक्ता घोंघड़े, निहारिका राठौर एवं अविषा शर्मा की सेवाएं सराहनीय रहीं, जिसकी शिव भक्तों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की।
उक्त जानकारी नंदकिशोर खूंटवाल एवं अरुण श्रीवास्तव द्वारा संयुक्त रूप से दी गई।