शाजापुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, शाजापुर द्वारा परिषद की केंद्रीय योजना के अंतर्गत विषयाधारित काव्य गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन पारिजात निवास (बी.पी. व्यास), ए.बी. रोड, शाजापुर में किया गया। कार्यक्रम में पंच परिवर्तन, राष्ट्रभाव, संस्कृति, सामाजिक समरसता एवं संगठन चेतना से जुड़े विषयों पर साहित्यकारों ने अपने विचार और काव्य प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ संजय बोराडे द्वारा गणेश एवं सरस्वती वंदना तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। काव्य गोष्ठी में स्वबोध, समरसता, नागरिक अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक चेतना पर केंद्रित रचनाओं का पाठ किया गया।
मुख्य अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद के महामंत्री योगेश उपाध्याय ने ष्स्वबोध से विश्वबोधष् विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि व्यक्ति जब स्वयं को पहचानता है, तभी समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकता है।
अध्यक्षता कर रही संतोष शर्मा ने अपने गीत ‘‘प्रेम के बंधन होते कितने सुहाने’’ की प्रस्तुति देकर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। परिषद अध्यक्ष जितेन्द्र देवतवाल ‘ज्वलंत’ ने परिषद परिवार की ओर से महामंत्री योगेश उपाध्याय का जन्मदिवस अभिनंदन कर उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की।
कवि सुरेशचंद्र शर्मा ने भगवा ध्वज और सेवा कार्यों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं। मोहाडकर ने कुटुंब प्रबोधन विषय पर कविता पाठ किया। बृज व्यास ने ‘‘हम हैं हिन्दुस्तानी’’ कविता के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। संजय बोराडे ने स्वयंसेवक जीवन, शाखा एवं समाज-संगठन संबंधों पर आधारित काव्य प्रस्तुत किया। जितेन्द्र देवतवाल ‘ज्वलंत’ ने पंच परिवर्तन, स्वबोध और पर्यावरण संरक्षण विषयक रचनाएं सुनाईं।
मशहूर शाजापुरी ने सामाजिक समरसता और देशभक्ति पर आधारित रचना प्रस्तुत कर सराहना प्राप्त की। राजेन्द्र सक्सेना ने इंसानियत, कौमी एकता और नागरिक अनुशासन पर अपनी कविताएं सुनाईं। सज्जाद अहमद कुरैशी ने चर्चित कविता ‘‘तिरंगे की सिलवटें’’ प्रस्तुत कर राष्ट्रीय चेतना का संदेश दिया।
वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश गोंड एवं हरिओम पाटीदार ने भी प्रेरणादायी रचनाओं का पाठ किया। पाटीदार की कविताओं में आत्मनिर्भर भारत और नवभारत की झलक दिखाई दी।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दुर्गाप्रसाद झाला की नवीन कृति ‘शब्द की नदी’ का लोकार्पण रहा। विशिष्ट अतिथि डॉ. जगदीश भावसार ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे संवेदनाओं और जीवनानुभूतियों से समृद्ध कृति बताया।
इस अवसर पर प्रख्यात शायर डॉ. बशीर बद्र को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। कार्यक्रम का संचालन परिषद अध्यक्ष जितेन्द्र देवतवाल ‘ज्वलंत’ ने किया तथा आभार बृज व्यास ने व्यक्त किया।