देवास। गजरा गियर्स प्रा. लि. से जुड़े 62 श्रमिक परिवारों ने अपने आवासीय अधिकारों को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है। श्रमिकों ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता कर कहा कि 1981 में उन्हें आवंटित मकानों की पूरी कीमत उनके वेतन से काट ली गई थी, इसके बावजूद आज तक मकानों की रजिस्ट्री उनके नाम नहीं की गई है।
श्रमिकों का कहना है कि मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद हाल ही में 62 मकानों की रजिस्ट्री कंपनी के नाम होने की जानकारी सामने आई है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
प्रेस वार्ता में श्रमिक परिवारों ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए “धोखाधड़ी और मिलीभगत” की आशंका जताई। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही उन्होंने मकानों के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की।
श्रमिकों ने कहा, “हम वर्षों से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वेतन से राशि कटने के बावजूद हमें आज तक हमारा अधिकार नहीं मिला। हमें सिर्फ हमारा हक चाहिए।”
इस पूरे मामले को लेकर श्रमिकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और सुरक्षा की मांग की है, जबकि विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर और तेज होने की संभावना है।