भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, उपस्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में ठेके पर काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को पिछले दो साल से न्यूनतम वेतन का एरियर नहीं मिल पाया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ओर से इस संबंध में आदेश जारी होने के बावजूद भुगतान नहीं हो सका है।
बताया जा रहा है कि हर साल बदल रहे ठेकेदारों और कर्मचारियों का सही रिकॉर्ड नहीं होने के कारण एरियर भुगतान में परेशानी आ रही है। ठेकेदारों द्वारा कर्मचारियों की जानकारी व्यवस्थित तरीके से नहीं रखने और मनमाने तरीके से कर्मचारियों को हटाने व रखने के कारण विभाग यह तय नहीं कर पा रहा है कि किन कर्मचारियों को एरियर दिया जाना है।
श्रम आयुक्त के आदेश के बाद प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2024 से पुनरीक्षित न्यूनतम वेतन देने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली कंपनियों के बाद स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन यहां अभी तक कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन और एरियर नहीं मिल पाया है।
वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के कई आउटसोर्स कर्मचारी 8 से 9 हजार रुपए महीने में काम करने को मजबूर हैं, जबकि सरकार द्वारा अकुशल श्रमिक के लिए न्यूनतम वेतन करीब 12,450 रुपए निर्धारित किया गया है।
26 महीने का एरियर बकाया, कर्मचारियों में नाराजगी
सरकार के निर्णय के अनुसार कर्मचारियों को अप्रैल 2024 से बढ़ा हुआ वेतन और उसका एरियर मिलना है। इसके चलते कर्मचारियों का करीब 26 महीने का एरियर बकाया है। अनुमान के मुताबिक एक कर्मचारी का 70 से 75 हजार रुपए तक एरियर बन सकता है।
एरियर भुगतान को लेकर प्रदेश के कई जिलों में आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा प्रदर्शन किए जा रहे हैं। एनएचएम ने 29 मई को एरियर भुगतान को लेकर आदेश जारी किया था, लेकिन जिलों से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद 15 जून को कर्मचारियों की जानकारी भेजने के लिए दोबारा निर्देश जारी किए गए।
भोपाल में स्वास्थ्य मंत्री के बंगले के घेराव की तैयारी
आउटसोर्स कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो भोपाल में स्वास्थ्य मंत्री के बंगले का घेराव किया जाएगा। इस संबंध में 28 जून को ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स अस्थाई कर्मचारी मोर्चा की बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
अस्थायी, ठेका आउटसोर्स श्रमिक कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने आरोप लगाया कि शासन द्वारा तय न्यूनतम वेतन के मुकाबले कर्मचारियों को काफी कम राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
छह सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
कर्मचारी संगठन ने छह सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी की है। इसमें ठेका प्रथा खत्म कर विभाग के माध्यम से सीधे वेतन भुगतान, अप्रैल 2024 से एरियर का सीधे कर्मचारियों के खाते में भुगतान, बकाया वेतन का भुगतान, तीन साल में होने वाली श्रेणी प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करना, हटाए गए कर्मचारियों को वापस काम पर लेना और कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देने जैसी मांगें शामिल हैं।