चित्तौड़गढ़। राजस्थान सरकार के पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने नगर परिषद द्वारा नगरीय विकास कर के संबंध में जारी अंतिम नोटिसों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर प्रदेश का व्यापारी वर्ग और आमजन पहले से ही आर्थिक मंदी, घटते व्यापार और बढ़ती महंगाई की मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा की भजनलाल सरकार नगरीय विकास कर के नाम पर लोगों पर नया आर्थिक बोझ डाल रही है।
प्रवक्ता नवरतन जीनगर ने बताया कि पूर्व राज्यमंत्री जाड़ावत ने अपने व्यक्तत्व में कहा कि वर्ष 2007 से 2700 वर्गफीट से अधिक आवासीय तथा 900 वर्गफीट से अधिक व्यावसायिक संपत्तियों पर नगरीय विकास कर के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। आवासीय संपत्तियों में निर्मित मंजिलों तथा व्यावसायिक भवनों में जितनी मंजिल निर्मित है, उसके आधार पर कर की गणना की जा रही है। कर निर्धारण का सूत्र क्षेत्रफल (वर्ग गज) × डीएलसी × 10.76 ÷ 2000 रखा गया है, जिससे हजारों संपत्ति मालिकों पर भारी आर्थिक भार पड़ने वाला है।
उन्होंने कहा कि नगर परिषद द्वारा 7 दिन में कर जमा नहीं करने पर भवन, होटल, रेस्टोरेंट और कॉम्प्लेक्स सीज करने जैसी चेतावनी देकर जनता और व्यापारियों में भय का वातावरण बनाया जा रहा है। यह लोकतांत्रिक सरकार का नहीं बल्कि दमनकारी सोच का परिचायक है।
जाड़ावत ने कहा कि सरकार को कर वसूली के लिए धमकाने के बजाय व्यापारियों और आमजन को राहत देने के उपाय करने चाहिए। जब बाजार में कारोबार ठप है, छोटे व्यापारी मुश्किल से अपना व्यवसाय चला रहे हैं और आम आदमी महंगाई से परेशान है, तब इस प्रकार के नोटिस जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ ही महीनों में प्रदेशभर में नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं, इसलिए भाजपा सरकार जनता पर आर्थिक दबाव बनाकर राजस्व जुटाने की कोशिश कर रही है। लेकिन प्रदेश की जनता इस जनविरोधी और व्यापारी विरोधी नीति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।
पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने राज्य सरकार से मांग की कि नगरीय विकास कर की इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए, नोटिसों की कार्रवाई तत्काल स्थगित की जाए तथा व्यापारियों, संपत्ति धारकों और आमजन को राहत प्रदान की जाए। कांग्रेस पार्टी जनता के हितों की रक्षा के लिए उनके साथ मजबूती से खड़ी है।