चित्तौड़गढ़। कार्यालय सहायक निदेशक कृषि विस्तार, कपासन के तत्वावधान में आरएनटी कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हॉल, कपासन में उर्वरक आदान विक्रेताओं के लिए फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में कृषि उपजिला कपासन के अंतर्गत पंचायत समिति कपासन, भूपालसागर एवं गंगरार क्षेत्र के लगभग 125 उर्वरक आदान विक्रेताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार, चित्तौड़गढ़ डॉ. शंकरलाल जाट रहे। प्रशिक्षण के दौरान सहायक निदेशक कृषि विस्तार, कपासन हीरालाल सालवी सहित कृषि विभाग के अधिकारियों ने उर्वरक वितरण की नवीन व्यवस्था, विभागीय प्रावधानों एवं डिजिटल प्रणाली की जानकारी दी।
प्रशिक्षण में FFS की कार्यप्रणाली एवं उद्देश्य, किसान पंजीकरण, ऑनलाइन बुकिंग, डीलर चयन, क्यूआर कोड आधारित उर्वरक वितरण तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। उपस्थित विक्रेताओं की व्यावहारिक समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का भी विषय विशेषज्ञों ने समाधान किया।
सहायक निदेशक कृषि विस्तार हीरालाल सालवी ने उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए लाइसेंसधारी उर्वरक आदान विक्रेताओं को अनुज्ञा पत्र में निर्धारित शर्तों एवं विभागीय दिशा-निर्देशों की पूर्ण पालना करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित दर पर उर्वरक विक्रय, स्टॉक एवं बिक्री अभिलेखों का नियमानुसार संधारण तथा किसानों को पारदर्शी एवं सुचारु रूप से उर्वरक उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
कृषि अधिकारी (फसल) प्रशांत कुमार जाटोलिया ने FFS की व्यावहारिक प्रक्रिया समझाते हुए संबंधित एप को इंस्टॉल एवं संचालित करने की जानकारी दी। उन्होंने किसान द्वारा ऑनलाइन बुकिंग, डीलर चयन तथा बुकिंग के बाद प्राप्त क्यूआर कोड के आधार पर उर्वरक वितरण की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया।
संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार डॉ. शंकरलाल जाट ने कहा कि FFS के प्रभावी क्रियान्वयन से उर्वरक वितरण व्यवस्था को तकनीक आधारित, अधिक पारदर्शी, सरल एवं किसान हितैषी बनाया जा सकेगा। नई व्यवस्था के तहत किसान ऑनलाइन बुकिंग एप के माध्यम से फार्मर आईडी एवं आधार नंबर के आधार पर उर्वरक की बुकिंग कर संबंधित डीलर का चयन कर सकेंगे। इसके बाद निर्धारित दर पर उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से उर्वरकों की कालाबाजारी, अनावश्यक टैगिंग एवं वितरण संबंधी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण में सहायता मिलेगी। साथ ही किसानों को लंबी कतारों से राहत मिलेगी तथा आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक समयबद्ध, पारदर्शी एवं सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध हो सकेगा।
इफको प्रतिनिधि एवं डिस्ट्रिक्ट एरिया मैनेजर मुकेश आमेटा ने उर्वरकों की उपलब्धता, संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग तथा किसानों तक उचित माध्यम से उर्वरक पहुंचाने में अधिकृत आदान विक्रेताओं की भूमिका पर जानकारी दी। उन्होंने किसानों को सही उर्वरक, सही मात्रा एवं उचित समय पर उपलब्ध कराने में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।
प्रशिक्षण के अंत में उपस्थित लगभग 125 उर्वरक आदान विक्रेताओं को नवीन डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप स्वयं को तैयार रखने, विभागीय दिशा-निर्देशों एवं उर्वरक नियंत्रण आदेश के प्रावधानों की पालना करने तथा उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं किसान सुविधा को प्राथमिकता देने का मार्गदर्शन दिया गया।