देवास। इंदिरा सागर परियोजना के डूब प्रभावित किसानों ने अब आंदोलन का ऐलान किया है। सतवास के धर्मेश्वर मंदिर में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले हरदा, खंडवा, खरगोन और देवास जिले के प्रभावित किसानों की बैठक हुई। किसानों ने इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर परियोजना के प्रभावितों को दिए गए मुआवजे में भेदभाव का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि एक ही नर्मदा नदी और एक ही सरकार होने के बावजूद ओंकारेश्वर परियोजना के प्रभावितों को विशेष पैकेज मिला, जबकि इंदिरा सागर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया।
किसानों ने हाईकोर्ट द्वारा जमीन के लिए निर्धारित 6 लाख 66 हजार 582 रुपये प्रति एकड़ के मुआवजे का पालन नहीं होने का भी आरोप लगाया। किसानों की मांग है कि सभी प्रभावितों को समान रूप से मुआवजा दिया जाए और लंबित राशि का लाभ भी दिलाया जाए।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 15 सितंबर को देवास, हरदा और खंडवा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो नर्मदा नगर स्थित इंदिरा सागर बांध पर आंदोलन शुरू किया जाएगा और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों ने पुरानी मुआवजा प्रक्रिया में प्रभावितों को कोर्ट जाने से रोके जाने का आरोप लगाते हुए रिफ्रेश केस से मिली राशि का लाभ उन किसानों को भी देने की मांग की है, जिन्होंने उस समय मुकदमा नहीं लगाया था।
किसानों का कहना है कि इंदिरा सागर परियोजना में जमीनें डूबे वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन आज भी मुआवजे और अधिकारों से जुड़े कई मामले पूरी तरह सुलझ नहीं पाए हैं।