चित्तौड़गढ़। 7वें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एवं इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अजय कुमार चौधरी ने भविष्य की वित्तीय तकनीक को लेकर अपना विजन प्रस्तुत किया। अपने मुख्य संबोधन में उन्होंने कहा कि वित्तीय व्यवस्था में विश्वास की संरचना अब केवल भुगतान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इंटेलिजेंस और प्रोग्रामेबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ेगी।
चौधरी ने भारतीय डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की तेज वृद्धि और तकनीक के अगले चरण के लिए NPCI के रोडमैप को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अगस्त 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से 24.5 अरब से अधिक लेन-देन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य ₹29.8 लाख करोड़ रहा। यह डिजिटल भुगतान नेटवर्क देशभर के 752 बैंकों के एकीकरण के साथ संचालित हो रहा है।
भविष्य की तकनीक पर NPCI का फोकस-
डिजिटल लेन-देन में सुरक्षा, गति और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए NPCI कई अत्याधुनिक तकनीकों पर काम कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अगले चरण के रूप में NPCI मानवीय नियंत्रण के तहत एजेंटिक AI के उपयोग के लिए ‘डिजिटल एजेंट्स प्रोटोकॉल’ विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य स्वचालित और बुद्धिमान वित्तीय सेवाओं को बढ़ावा देना है।
संस्थागत पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए NPCI ने अपना ओपन-सोर्स ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म ‘ड्रनिक्स’ भी विकसित किया है। वहीं, भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग से साइबर सुरक्षा के सामने पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए NPCI अभी से पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी सुरक्षा मानकों की तैयारी कर रहा है।
NPCI की रणनीति किसी एक क्लाउड प्लेटफॉर्म या AI मॉडल पर अत्यधिक निर्भरता से बचने की भी है। इसके साथ ही संस्थागत क्षमता मजबूत करने और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
तकनीक का उद्देश्य बेहतर निर्णय और समावेशी विकास-
अपने संबोधन के समापन में चौधरी ने कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य केवल गति बढ़ाना या आंकड़ों में वृद्धि करना नहीं है, बल्कि बेहतर निर्णय लेने, प्रणालियों का लचीलापन बढ़ाने और समाज के समावेशी विकास में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि NPCI आने वाले समय में भी राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर भविष्य की वित्तीय व्यवस्था को दिशा देने और आकार देने में अपनी अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।