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September 17, 2026, 2:41 pm
KHABAR : मंत्री सिलावट का फरमान, बगैर अनुमति मिलने आए तो कार्यवाही, अधीक्षण यंत्री ने मैदानी अधिकारियों-कर्मचारियों को लिखा पत्र, कर्मचारी नेता बोले-ये तुगलकी फरमान, पढे़ खबर

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भोपाल। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब बिना अनुमति मुलाकात नहीं कर सकेंगे। मंत्री की आपत्ति के बाद जल संसाधन विभाग ने सभी मुख्य अभियंताओं और परियोजना संचालकों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। निर्देश में बिना अनुमति मंत्री से मुलाकात को शिष्टाचार के विरुद्ध बताते हुए भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं करने की हिदायत दी गई है।


जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय के अधीक्षण यंत्री (प्रशासन) आशीष महाजन ने बुधवार को यह निर्देश जारी किया। इसमें बताया गया कि मंत्री सिलावट ने 15 सितंबर को पत्र लिखकर बिना अनुमति उनसे मिलने पहुंचने वाले विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों पर आपत्ति जताई थी। मंत्री ने ऐसी मुलाकातों की व्यवस्था नियंत्रित करने के निर्देश दिए।


अनुमति नहीं ली तो अनुशासनात्मक कार्रवाई
निर्देश में कहा गया है कि सभी मुख्य अभियंता और परियोजना संचालक अपने अधीनस्थ कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को इसकी सूचना दें। अब मंत्री से मिलने के लिए पहले अनुमति लेना जरूरी होगा। निर्देश का पालन नहीं करने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


कर्मचारी बोले- समस्या बताने के लिए भी मंत्री तक नहीं पहुंच पाएंगे
मंत्री के निर्देश को लेकर कर्मचारी नेताओं ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कर्मचारी आमतौर पर तभी मंत्री से मिलने जाते हैं, जब विभागीय स्तर पर उनकी समस्या का निराकरण नहीं हो पाता। ऐसे में मंत्री से मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी कर्मचारियों के लिए समस्या खड़ी कर सकती है।


कर्मचारी नेताओं ने इसे ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए सवाल उठाया कि यदि कर्मचारी अपनी विभागीय समस्या बताने के लिए मंत्री तक ही नहीं पहुंच पाएंगे, तो उनकी शिकायतों का समाधान कैसे होगा।


प्रमुख अभियंता भी लिख चुके हैं पत्र
इसके पहले प्रमुख अभियंता विनोद देवड़ा ने सभी मुख्य अभियंताओं को पत्र लिखकर विभाग में प्रशासकीय नियंत्रण की बात कही थी। 12 सितंबर को लिखे पत्र में देवड़ा ने कहा कि कई अधिकारी, कर्मचारी मुख्यालय पर नहीं रहते हैं जो मुख्य अभियंता के नियंत्रण में लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में यह भी देखा गया है कि अधिकारी कर्मचारी मुख्य अभियंता के संज्ञान में लाए बिना अनुमति बगैर भोपाल या अन्य स्थानों पर प्रवास पर रहते हैं जो सर्वथा अनुचित है। भविष्य में अधीनस्थों को लेकर कोई शिकायत मिलती है तो इसकी जिम्मेदारी मुख्य अभियंता की होगी।

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