BREAKING NEWS
BIG NEWS : इंदौर पहुंचे भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष.. <<     KHABAR : दूदरसी में धूमधाम से मनाया भगवान श्री.. <<     KHABAR : मंत्री सिलावट का फरमान, बगैर अनुमति मिलने.. <<     KHABAR : 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगालकर.. <<     KHABAR : विश्व बांस दिवस विशेष, बांस की खेती से जैव.. <<     BIG NEWS : नीमच जिले का ग्राम बोरखेड़ा दतौली और सुबह.. <<     KHABAR : सरकारी दावों की खुली पोल, कच्चा मकान ढहा.. <<     KHABAR : प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर सेवा.. <<     KHABAR : एमपी में स्वामित्व योजना की शुरुआत आज, 50.. <<     KHABAR : पर्युषण महापर्व के समापन पर कुकड़ेश्वर.. <<     BIG NEWS : नीमच जिले के डूंगलावदा में दर्दनाक सड़क.. <<     BIG NEWS : 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज.. <<     BIG NEWS : नीमच के बाबजी एएसी ब्लॉक प्लांट में.. <<     KHABAR : पीएम मोदी का बर्थडे और चीता प्रोजेक्ट का 4.. <<     KHABAR : पीएम मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प.. <<     KHABAR : पीएम मोदी के जन्मदिन पर आशीर्वाद का दीया.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
September 17, 2026, 1:52 pm
KHABAR : विश्व बांस दिवस विशेष, बांस की खेती से जैव विविधता संरक्षण तक, बैम्बू मैन कमलाशंकर विश्वकर्मा ने खड़ा किया अनूठा मॉडल, पढे़ खबर

Share On:-

नीमच। विश्व बांस दिवस के अवसर पर नीमच जिले के ग्राम भाटखेड़ी निवासी प्रगतिशील किसान कमलाशंकर विश्वकर्मा की बांस आधारित खेती और जैव विविधता संरक्षण की पहल चर्चा में है। क्षेत्र में स्नेहपूर्वक ‘बैम्बू मैन’ के नाम से पहचाने जाने वाले कमलाशंकर विश्वकर्मा ने खेती को केवल उत्पादन और आमदनी का जरिया न बनाकर इसे पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, प्रशिक्षण और ग्रामीण पर्यटन से जोड़ते हुए एक अनूठा मॉडल तैयार किया है।

माइक्रोबायोलॉजी में स्नातक तथा समाज कार्य और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त कमलाशंकर ने कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न प्रशिक्षणों के माध्यम से अपने ज्ञान को आगे बढ़ाया। खेती में पूर्णकालिक रूप से आने से पहले वे दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्य कर चुके हैं। कोरोना काल के दौरान उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने गांव लौटने और कृषि के क्षेत्र में एक नया प्रयोग शुरू करने का निर्णय लिया।

एक हेक्टेयर से शुरू हुआ नवाचार
गांव लौटने के बाद कमलाशंकर ने भाटखेड़ी में करीब एक हेक्टेयर भूमि पर बांस की उन्नत खेती शुरू की। धीरे-धीरे यही खेत ‘विश्वकर्मा बैम्बू फार्म एंड बायोडायवर्सिटी पार्क’ और ‘फूड फॉरेस्ट नीमच’ के रूप में विकसित हुआ। बांस के साथ अश्वगंधा, शतावरी सहित विभिन्न औषधीय पौधों और बहुवर्षीय वृक्षों को शामिल कर उन्होंने बहुस्तरीय खेती का मॉडल तैयार किया।

फार्म पर करीब 30 से 40 प्रकार की औषधीय प्रजातियों का संरक्षण और प्रदर्शन किया जाता है। इसके साथ ही यहां करीब 25 से 30 प्रजातियों के पक्षी और 10 से 12 प्रजातियों की बड़ी तितलियां भी देखी जाती हैं। इस तरह यह खेत मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु-सहनशील कृषि का जीवंत उदाहरण बन गया है।

बांस से रोजगार और पर्यावरण संरक्षण
कमलाशंकर ने बांस को खेती के साथ उद्यमिता से भी जोड़ा है। पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में उन्होंने बांस से इको-फ्रेंडली टूथब्रश तैयार किए। इसके अलावा जैविक अनाज, दालें, मसाले और जड़ी-बूटियों के मूल्य संवर्धन एवं बिक्री के लिए ‘विश्वकर्मा ऑर्गेनिक्स’ के माध्यम से भी काम किया जा रहा है।

उनका फार्म अब पर्यावरण पर्यटन, पिकनिक, फोटोग्राफी और प्री-वेडिंग शूट के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से वे बांस की खेती, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

किसान और युवाओं के लिए बना लर्निंग साइट
कमलाशंकर विश्वकर्मा ने अपने फार्म को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ‘लर्निंग साइट’ के रूप में भी विकसित किया है। यहां किसान, विद्यार्थी, शोधार्थी और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोग खेती के व्यावहारिक मॉडल को समझने पहुंचते हैं।

वे किसानों, विद्यार्थियों और युवाओं के लिए प्रशिक्षण, फील्ड विजिट और परामर्श कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं। उनके प्रयासों से करीब 15 से 20 लोगों को रोजगार मिलने की जानकारी है। इसके अलावा वे आनंद विभाग में राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर के रूप में वॉलंटियर सेवाएं भी दे रहे हैं।

नवाचार के लिए मिल चुके कई सम्मान
बांस आधारित कृषि-वनीकरण, पर्यावरण पर्यटन और पुनर्योजी कृषि के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए कमलाशंकर विश्वकर्मा को विभिन्न मंचों पर सम्मान मिल चुके हैं।

वर्ष 2020-21 में उन्हें आत्मा परियोजना के अंतर्गत जिला स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार मिला। वर्ष 2024 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर की ओर से ‘कृषक फैलो सम्मान’ प्रदान किया गया। वर्ष 2025 में ‘प्रो. रतनलाल अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन रिजनरेटिव एग्रीकल्चर’ में राष्ट्रीय सम्मान तथा वर्ष 2026 में आर्ट ऑफ लिविंग का ‘अनसंग एवरीडे हीरोज अवॉर्ड’ भी उन्हें मिला।

कमलाशंकर विश्वकर्मा का मानना है कि बांस केवल एक फसल नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण संसाधन है। उनका प्रयास ऐसी खेती को बढ़ावा देना है, जिससे किसान की आय बढ़ने के साथ मिट्टी, पानी, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रह सके।

विश्व बांस दिवस पर ‘बैम्बू मैन’ कमलाशंकर विश्वकर्मा की पहल यह संदेश देती है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर, स्थानीय संसाधनों और नवाचार का उपयोग किया जाए तो एक खेत भी पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और ग्रामीण विकास की बड़ी प्रयोगशाला बन सकता है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE