रायसेन। जिले के उदयपुरा में स्थित दादा धूनी दरबार में 51 दिन का एक धार्मिक आयोजन हुआ। इसमें आस्था का अनोखा रूप देखने को मिला। यज्ञ की धूनी में करीब डेढ़ किलो सोना और 4 से 5 किलो चांदी के आभूषण चढ़ाए गए।
आयोजकों के मुताबिक, इस धूनी में 1 लाख 51 हजार किलो फल-फूल, मिठाइयां, कपड़े, हवन सामग्री और 251 तरह की जड़ी-बूटियां भी अर्पित की गईं।
इस आयोजन के दौरान संत शिवानंद जी महाराज को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र भी दिया गया। आयोजकों ने बताया कि यह धार्मिक आयोजन 29 जुलाई 2026, गुरु पूर्णिमा से शुरू होकर 17 सितंबर 2026 तक चला। वहीं, 21 दिन का नर्मदा संकीर्तन 8 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
संत बोले- 24 घंटे प्रसादी की व्यवस्था की गई
संत शिवानंद जी महाराज के अनुसार, धूनी को मां नर्मदा का रूप मानकर श्रृंगार चढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि दादा धूनी वाले महाराज और मां नर्मदा की कृपा से यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
महाराज ने कहा कि धूनी में चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषण अग्नि में भस्म होकर स्वर्ण और रजत भस्म बन जाते हैं। बाद में इस भस्म को मां नर्मदा में विसर्जित किया जाता है।
आयोजन में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे प्रसादी की व्यवस्था की गई थी। संत शिवानंद महाराज ने कहा कि भोजन कभी कम नहीं पड़ा और यह सब दादा धूनी वाले महाराज की कृपा से ही संभव हुआ।
संत शिवानंद महाराज ने यह भी बताया कि साल भर अलग-अलग जगहों पर ऐसे कई धार्मिक आयोजन किए जाते हैं और इनमें किसी से चंदा या सहयोग नहीं लिया जाता। श्रद्धालु उमाशंकर मालवीय ने इस आयोजन को आस्था और दादा धूनी वाले महाराज के प्रति श्रद्धा से जुड़ा बताया।