खरगोन। अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर शहर में जन-जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में बधिर जन शामिल हुए। बधिर कल्याण और सामुदायिक विकास निमाड़ बधिर संघ द्वारा शहर के किला मैदान से दोपहर 12 बजे रैली निकाली गई। यह रैली शहर के विभिन्न मार्गाे से होते हुए गौरीधाम स्थित देव्यानी विश्राम भवन पहुंची। यहां रैली सभा में तब्दील हुई। कार्यक्रम की विशेषता रही कि बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा के संदर्भ में सांकेतिक भाषा के महत्व और दिव्यांगजनों के अधिकारों पर चर्चा भी सांकेतिक भाषा में ही की गई। संघ के सचिव प्रमोद पंवार एवं अनुवादक प्रीति लालवानी ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य सांकेतिक भाषा के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना था। इसके साथ ही बधिरजनों के मानवाधिकारों की घोषणा, समुदाय के प्रति सम्मान, समानता, संवेदनशीलता और समावेशी दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना रहा।सांकेतिक भाषा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे सभी कर्मचारियों और आम नागरिको को भी सीखना चाहिए, जिससे बधिरों से संपर्क में आसानी रहे।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक रवि जोशी भी शामिल हुए। उन्होंने बधिरों की सांकेतिक भाषा में हो रही चर्चा की सराहना करते हुए कहा कि ईश्वर ने भले ही आप लोगो को सुनने- बोलने की शक्ति नही दी, लेकिन आप को ईशारे से समझने की अतिरिक्त शक्ति जो दी है, वह आम इंसान से अधिक महत्वपूर्ण है। सांकेतिक भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि बधिर एवं मूक-बधिर व्यक्तियों के अधिकार और आत्मसम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि बधिर कल्याण संघ द्वारा आज जो यह जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया है, निश्चित ही यह मूक.बधिर एवं अन्य दिव्यांगजनों के अधिकारो, सम्मान, सहभागिता तथा समाज की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में कारगर कदम साबित होगा। इस दौरान दिव्यांगजनों के अधिकारों, शासकीय योजनाओं और सामाजिक सहभागिता से जुड़े विषयों पर जानकारी दी गई।