नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आदिवासियों के ज्वलंत मुद्दों और उनके अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक और सामाजिक रणनीतियों का खाका तैयार करते हुए प्रदेश के 89 आदिवासी ब्लॉक पर विशेष रूप से फोकस करने का निर्णय लिया है। पार्टी अब आदिवासी मुद्दों को एक बड़े जन आंदोलन के रूप में जमीन पर उतारने की तैयारी कर रही है। बैठक के दौरान इस बात पर भी खुलकर चर्चा की गई कि अतीत में पार्टी बड़े आदिवासी मामलों को जनता के साथ प्रभावी ढंग से क्यों नहीं जोड़ पाई।
‘मध्यप्रदेश आदिवासी अधिकार, संरक्षण एवं सशक्तिकरण समिति’ की बैठक
दिल्ली स्थित कांग्रेस दफ्तर में आयोजित ‘मध्यप्रदेश आदिवासी अधिकार, संरक्षण एवं सशक्तिकरण समिति’ की इस बैठक में आदिवासी समाज के समक्ष मौजूदा समय में मौजूद तमाम चुनौतियों, उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, जल-जंगल-जमीन के हकों, शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य और समग्र विकास से जुड़े तमाम गंभीर मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के हितों की पूरी तरह रक्षा करना और उनके सर्वांगीण सशक्तिकरण के लिए एक बेहद प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना रहा। नेताओं ने माना कि आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर अब सड़क से लेकर सदन तक आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय बैठक में मध्य प्रदेश कांग्रेस के तमाम बड़े और दिग्गज चेहरे शामिल हुए। बैठक में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा ‘मध्यप्रदेश आदिवासी अधिकार, संरक्षण एवं सशक्तिकरण समिति’ के सदस्य विक्रांत भूरिया, ओमकार सिंह मरकाम, फूंदेलाल मार्को, झूमा सोलंकी, संजय उइके, सुनील उइके और डॉ. अशोक मर्सकोले ने भी बैठक में हिस्सा लिया और अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। इन सभी नेताओं ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच पकड़ को और अधिक धारदार बनाने पर जोर दिया।