शाजापुर। जिले में नाबालिग पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर मामले में विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट), शाजापुर ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास सहित अलग-अलग धाराओं में कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने तीन दोषियों मयंक उर्फ गोलू विश्वकर्मा, शाहदत उर्फ राजा और अनस उर्फ अनीस खां को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई। वहीं, दुर्गेश राठौर और सुनीता राठौर को भी संबंधित धाराओं में दोषी ठहराते हुए दंडित किया गया।
जिला अभियोजन कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मयंक उर्फ गोलू विश्वकर्मा, शाहदत उर्फ राजा और अनस उर्फ अनीस खां को धारा 70(2) बीएनएस तथा धारा 5(जी)(एच)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त धारा 137(2) बीएनएस में 7 वर्ष, धारा 87 बीएनएस में 10 वर्ष, धारा 127(2) में 6 माह और धारा 351(3) में 5 वर्ष का कठोर कारावास दिया गया। धारा 16/17 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष तथा एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं में भी सजा और अर्थदंड लगाया गया।
दोषी दुर्गेश राठौर को धारा 64(2)(एम) बीएनएस तथा धारा 5(एल)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा धारा 137(2) बीएनएस में 7 वर्ष, धारा 87 में 10 वर्ष, धारा 127(2) में 6 माह और धारा 16/17 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का कठोर कारावास सहित एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं में भी दंडित किया गया।
वहीं, दोषी सुनीता राठौर को धारा 142 बीएनएस में 7 वर्ष का कठोर कारावास, धारा 16/17 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का कठोर कारावास और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सभी दोषियों पर संबंधित धाराओं में अर्थदंड भी लगाया गया है।
ऐसे सामने आया था मामला-
मीडिया सेल प्रभारी एवं जिला अभियोजन अधिकारी (अजाक) शाजापुर प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि 26 जून 2025 को पीड़िता के पिता ने शुजालपुर मंडी थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने 30 जून 2025 को पीड़िता को दस्तयाब किया। इसके बाद महिला पुलिस अधिकारी के समक्ष दिए गए बयान में पीड़िता ने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी।
पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, आरोपियों ने उसे अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले में दुर्गेश और सुनीता की भूमिका भी सामने आई। पुलिस ने संपूर्ण विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
डीएनए रिपोर्ट बनी महत्वपूर्ण साक्ष्य-
प्रकरण में मेडिकल परीक्षण के बाद पीड़िता से प्राप्त जब्तशुदा प्रदर्शों की डीएनए जांच कराई गई। डीएनए रिपोर्ट में मिले साक्ष्य अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण साबित हुए। न्यायालय ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों का परीक्षण करने के बाद पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया।
न्यायालय ने फैसले में की महत्वपूर्ण टिप्पणी-
न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म कराने की साझा मंशा रखती है या अपराध में सहायता करती है, तो उसे भी सामूहिक दुष्कर्म के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके लिए उसका स्वयं शारीरिक कृत्य में शामिल होना आवश्यक नहीं है।
न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित धारा 70(2) बीएनएस के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि समूह के सामान्य आशय को आगे बढ़ाते हुए अपराध किए जाने की स्थिति में प्रत्येक संबंधित व्यक्ति को अपराध का दोषी माना जा सकता है।
प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सोलंकी और प्रदीप कुमार भटेले ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों से सहमत होते हुए विशेष न्यायालय ने पांचों आरोपियों के विरुद्ध दोषसिद्धि का निर्णय पारित किया।