भोपाल। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन की सोमवार 5 अक्टूबर को अंतिम तारीख है। आवेदन की संख्या कम रहने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने पात्रता परीक्षा के दायरे में आने वाले शिक्षकों से आवेदन कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों के माध्यम से व्यक्तिगत संवाद शुरू किया है। इसके लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की सूचीवार ड्यूटी तय किए जाने की जानकारी सामने आई है। उन्हें शिक्षकों से संपर्क कर आवेदन प्रक्रिया पूरी कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
शिक्षक संगठनों ने विभाग की इस कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों के जरिए शिक्षकों पर टीईटी में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि विभाग को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि परीक्षा के लिए आवेदन स्वैच्छिक है या अनिवार्य और आवेदन नहीं करने पर क्या कार्रवाई होगी।
23 हजार से ज्यादा आवेदन, शिक्षक पूछ रहे- किस पद के लिए दें परीक्षा?
स्कूल शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा मंडल को टीईटी की ऑफलाइन परीक्षा कराने के लिए परीक्षा एजेंसी बनाया है। पहले 18 सितंबर तक आवेदन की तारीख तय थी, जिसे बढ़ाकर 5 अक्टूबर किया गया। इसके बावजूद अब तक 23 हजार से ज्यादा शिक्षकों ने ही आवेदन किया है।
शिक्षकों का कहना है कि वे 1998 में शिक्षाकर्मी बने, 2011 में अध्यापक पद पर पदोन्नत हुए और 2024 में उच्च माध्यमिक शिक्षक का प्रभार दिया गया। ऐसे में उन्हें किस पद के लिए टीईटी देना है, विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए।
फीस लेकर परीक्षा कराने पर भी सवाल
शिक्षक संगठनों ने परीक्षा शुल्क लिए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि टीईटी सरकार की ओर से कराई जा रही है तो शिक्षकों से परीक्षा आवेदन शुल्क क्यों लिया जा रहा है। राजधानी में चल रहे आंदोलनों में शिक्षकों से टीईटी के लिए आवेदन नहीं करने की अपील भी की जा रही है।