बड़वानी। जनजातीय कार्य विभाग एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों, आश्रम शालाओं एवं आवासीय विद्यालयों में पदस्थ संविदा अधीक्षकों ने 7 वर्ष से अधिक समय से एक ही संस्था में पदस्थ अधीक्षकों को परिवर्तित किए जाने संबंधी आदेश का विरोध करते हुए मंगलवार को संबंधित अधिकारियों के माध्यम से आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग भोपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। संविदा अधीक्षकों ने अपने ज्ञापन में 1 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र क्रमांक 18181 के आधार पर की जा रही कार्रवाई को निरस्त करने तथा जब तक इस संबंध में नया निर्देश प्राप्त न हो, तब तक आदेश पर कार्रवाई स्थगित रखने की मांग की है।
ज्ञापन में संविदा अधीक्षकों ने बताया कि आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा 1 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में जिले के छात्रावास, आश्रम शालाओं एवं आवासीय विद्यालयों में पदस्थ अधीक्षक-अधीक्षिकाओं की कार्य अवधि की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संस्था में अधीक्षक/अधीक्षिका के पद पर 7 वर्ष से अधिक कोई व्यक्ति पदस्थ न रहे। साथ ही 7 वर्ष से अधिक अवधि से पदस्थ अधीक्षकों को परिवर्तित करने के निर्देश दिए गए हैं।
संविदा अधीक्षकों का कहना है कि उक्त आदेश नियमित अधीक्षकों के संदर्भ में है, जबकि वर्तमान में संबंधित संस्थाओं में पदस्थ अधीक्षक संविदा आधार पर नियुक्त हैं। उन्होंने वर्ष 2008 में जारी संविदा अधीक्षक भर्ती नियमों का हवाला देते हुए कहा कि इन नियमों के तहत छात्रावास एवं आश्रमों में संविदा अधीक्षकों की नियुक्ति की गई थी। उनका तर्क है कि 1 अक्टूबर 2026 के आदेश में कहीं भी ‘संविदा अधीक्षक’ शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, इसलिए उक्त आदेश को संविदा अधीक्षकों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में संविदा अधीक्षकों ने यह भी उल्लेख किया कि 14 मई 2008 को प्रकाशित भर्ती नियमों के तहत संविदा अधीक्षकों की नियुक्ति की गई है तथा इन नियमों में नियुक्ति, सेवा अवधि एवं अन्य शर्तों का प्रावधान है। उनके अनुसार प्रथम बार संविदा नियुक्ति 5 वर्ष के लिए की गई तथा कार्य एवं गोपनीय रिपोर्ट के मूल्यांकन के आधार पर इसे आगामी अवधि के लिए जारी रखने का प्रावधान है। इसके अलावा नियुक्ति के बाद संबंधित संविदा अधीक्षकों एवं विभाग के बीच अनुबंध भी निष्पादित किए गए हैं।
ज्ञापन में यह भी दावा किया गया कि उनकी नियुक्ति से संबंधित शर्तों में न्यायालयीन निर्णयों का भी उल्लेख है। ऐसे में संविदा अधीक्षकों का कहना है कि उनकी सेवा शर्तों में परिवर्तन केवल निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है।
संविदा अधीक्षकों ने 22 मई 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण नीति 2026 का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उक्त नीति नियमित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए है। उनका कहना है कि संविदा कर्मचारियों के स्थानांतरण के संबंध में अलग से स्पष्ट नीति आवश्यक है और वर्तमान में संविदा अधीक्षकों के लिए ऐसी कोई पृथक स्थानांतरण नीति जारी नहीं की गई है। इसी आधार पर उन्होंने 1 अक्टूबर 2026 के आदेश के तहत प्रस्तावित स्थानांतरण एवं परिवर्तन की कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि 1 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र को निरस्त किया जाए तथा धार एवं बड़वानी जिले के विभागीय अधिकारियों को उक्त आदेश के आधार पर संविदा अधीक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही जब तक आयुक्त स्तर से इस संबंध में अन्य निर्देश प्राप्त न हों, तब तक संबंधित कार्रवाई स्थगित रखने की मांग की गई।
ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग भोपाल एवं संभागीय उपायुक्त, जनजातीय कार्य विभाग इंदौर संभाग को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
ज्ञापन देने वालों में संतोष पटेल, चुन्नीलाल बन्डीड़, सुनीता अवास्या, माठा/माठा परिना दुमंनिया, ममता परिहार, मनोज कर्मा, सुभाष यादव, सादिक खान, दिनेश मोरे, पंकज कुमार वास्कले, राजन बालक प्रकाश बोथो, निर्मला वर्मा एवं सपना जाधव सहित अन्य संविदा अधीक्षक-अधीक्षिकाएं शामिल रहे।
संविदा अधीक्षकों ने विभाग से पूरे मामले में भर्ती नियम 2008, नियुक्ति आदेश एवं निष्पादित अनुबंधों के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की है।