नीमच। बिजली विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लोड मैनेजमेंट के नाम पर की जा रही बिजली कटौती से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। दूदर्शी, दारू, खेरमालिया, बामनबर्डी, बिसलवासकलां, तेलनखेड़ी, खड़ावदा और धनेरिया कला सहित आसपास के गांवों में सुबह-शाम बिजली बंद रहने से ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार शाम करीब 7:15 से 7:30 बजे, रात करीब 3 से 3:30 बजे तथा सुबह करीब 7 बजे लोड मैनेजमेंट के नाम पर बिजली आपूर्ति बाधित की जा रही है। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में फसल कटाई और उपज निकालने का काम चल रहा है। ऐसे में दिनभर खेतों में काम करने के बाद किसान जब शाम को घर लौटते हैं, उसी समय बिजली बंद हो जाने से परेशानी और बढ़ जाती है।
शाम के समय बिजली कटौती से महिलाओं को खाना बनाने में परेशानी होती है। वहीं सुबह भी घरेलू कामकाज के दौरान बिजली बंद रहने से दिक्कतें सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पशुपालक परिवार हैं। शाम और सुबह गाय-भैंस का दूध निकालने के समय अंधेरा होने से महिला और पुरुषों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे में सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा भी बना रहता है।
हालिया करंट हादसे के बाद ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता उस समय और बढ़ गई, जब अमरावली महल निवासी आउटसोर्स लाइनमैन प्रतापसिंह राजपूत की मंगलवार को करंट लगने से मौत हो गई। परिजनों और समाजजनों ने आरोप लगाया था कि बिजली बंद रखने का परमिट होने के बावजूद लाइन में करंट दौड़ने से हादसा हुआ। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस घटना के बाद आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर बिजली कटौती से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली लाइनों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग से मांग की है कि लोड मैनेजमेंट के नाम पर सुबह-शाम के समय की जाने वाली कटौती की समीक्षा की जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुचारू रखी जाए। साथ ही बिजली लाइनों पर काम के दौरान सुरक्षा मानकों और परमिट व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।