मंदसौर। राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में भारत का पक्ष रखते हुए संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। संयुक्त राष्ट्र की बजटीय समिति की बैठक में उन्होंने सदस्य देशों द्वारा अंशदान के समय पर भुगतान, बकाया राशि और विकासशील देशों पर बढ़ते वित्तीय बोझ को लेकर अपनी बात रखी।
सदस्य देश समय पर पूरा अंशदान दें-
सांसद गुर्जर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को संगठन के लिए निर्धारित अंशदान पूरी राशि में, समय पर और बिना शर्त जमा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अपने दायित्वों और कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए पर्याप्त एवं स्थिर वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि 30 सितंबर 2026 तक संयुक्त राष्ट्र की कुल बकाया राशि 5.6 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है। उन्होंने चिंता जताई कि सदस्य देशों द्वारा समय पर अंशदान का भुगतान नहीं किए जाने से संयुक्त राष्ट्र के कामकाज और विभिन्न अभियानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
भारत को लगातार मिल रहा ‘ऑनर रोल’ में स्थान-
गुर्जर ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र को अपना निर्धारित अंशदान नियमित रूप से और समय पर जमा करता रहा है। इसी प्रतिबद्धता के कारण भारत को संयुक्त राष्ट्र की ‘ऑनर रोल’ सूची में लगातार स्थान मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर वित्तीय योगदान देना भारत की संयुक्त राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
शांति अभियानों में योगदान देने वाले देशों का मुद्दा उठाया-
राज्यसभा सांसद ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सैनिकों और पुलिस बलों का योगदान देने वाले देशों को भुगतान में होने वाली देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शांति अभियानों में बड़ी संख्या में विकासशील देश अपने सैनिक और पुलिसकर्मी भेजते हैं। ये देश अपनी सीमित संसाधन क्षमता के बावजूद संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय व्यवस्था तैयार करते समय सदस्य देशों की भुगतान क्षमता और उनकी आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि विकासशील देशों पर अनावश्यक वित्तीय दबाव न पड़े। साथ ही, शांति अभियानों में योगदान देने वाले देशों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।