चित्तौड़गढ़। निंबाहेड़ा शहर के कमधज नगर स्थित श्री कल्लाजी मंदिर वेद विद्यालय के साथ वैदिक अनुष्ठानो नवरात्रि के विशेष आयोजन के लिए मां बगलामुखी की विशेष प्रतिमा तैयार की गई है। मध्यप्रदेश के नरसिंहगढ़ निवासी मूर्तिकार ’ओमप्रकाश चौहान’ पिछले करीब 22 वर्षों से हर साल कल्लाजी के शक्तिपीठ पर बगलामुखी माता की प्रतिमा तैयार करते आ रहे हैं। इस बार भी उन्होंने करीब सात दिन में माता और असुर की प्रतिमा तैयार की है।
मां का रौद्र स्वरूप, असुर की जीभ पकड़कर स्तंभित करती हैं
मंदिर में तैयार की गई प्रतिमा मां बगलामुखी के रौद्र स्वरूपको दर्शाती है। इसमें माता असुर की जीभ पकड़कर उसे अपनी शक्ति से स्तंभित करती हुई दिखाई गई हैं। धार्मिक मान्यता में मां बगलामुखी के इस स्वरूप को दुष्ट शक्तियों, शत्रु की वाणी और नकारात्मक प्रवृत्तियों को रोकने वाली स्तंभन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। माता के इसी स्वरूप में असुर घुटनों के बल दिखाई देता है और उसकी जीभ बाहर निकली हुई है। मूर्तिकार ओमप्रकाश ने बताया कि माता के स्वरूप में क्रोध का भाव रखा गया है। वहीं माता के पीले वस्त्र और पीले श्रृंगार के कारण उन्हें पीतांबरा स्वरूप भी कहा जाता है। बगलामुखी उपासना में पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है। मूर्तिकार ओमप्रकाश ने बताया कि प्रतिमा के निर्माण में घास, लकड़ी और मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। इसके बाद रंग-रोगन किया गया।
इसलिए प्रतिमा को इको फ्रेंडली स्वरूप दिया गया है। माता की प्रतिमा का वजन करीब 25 किलो है, वहीं माता और असुर दोनों प्रतिमाओं का कुल वजन करीब 55 किलो है। प्रतिमा तैयार करने में करीब सात दिन का समय लगा। मूर्ति बनाने में करीब 40 हजार रूपए का खर्च आता है।
नरसिंहगढ़ निवासी ओमप्रकाश चौहान ने बताया कि वे करीब 2005-06 से हर साल कल्लाजी वेदपीठ पर बगलामुखी माता की प्रतिमा बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 22 साल पहले एक बार माता के श्रृंगार में बदलाव के दौरान उन्हें विशेष अनुभूति हुई थी। इसके बाद उन्होंने मंदिर कल्लाजी से विनती अनुमति लेकर माता का श्रृंगार परिवर्तन करते है।