चित्तौड़गढ़। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आगामी विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में मानसिक स्वास्थ्य विषय पर प्रशिक्षण एवं क्षमतावर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश मानसिंह चुण्डावत के निर्देशानुसार आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव योगिता पारीक ने कहा कि जिस प्रकार शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना आवश्यक है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है। तनाव मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक है। इसलिए जीवन में तनाव से निपटने और विभिन्न परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि मनोचिकित्सक डॉ. कविता परमार ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों की जानकारी दी। उन्होंने शारीरिक बदलाव, मानसिक एवं बौद्धिक विकास, पहचान का संकट और भावनात्मक उतार-चढ़ाव जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने माता-पिता से युवाओं की भावनाओं को समझने, उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर देने और उनके साथ मित्रवत व्यवहार करने की अपील की।
डॉ. परमार ने बताया कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, नशे से दूरी और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने घबराहट एवं तनाव की स्थिति में सांसों की गिनती करने, तनाव से निपटने के विभिन्न तरीकों तथा कार्यस्थल पर तनाव प्रबंधन के संबंध में भी प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम में डॉ. मुकेश कुमार जाटोलिया ने तनाव के कारण होने वाली आत्महत्या की घटनाओं और उनकी रोकथाम के उपायों पर जानकारी दी। उन्होंने आत्महत्या रोकथाम में ‘गेटकीपर’ की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि थोड़ी-सी जानकारी और संवेदनशीलता के साथ कोई भी व्यक्ति सामुदायिक स्तर पर इस दिशा में योगदान दे सकता है।
उन्होंने गेटकीपर के रूप में मानसिक परेशानी के संकेतों और जोखिम कारकों की पहचान करने, संबंधित व्यक्ति की बात सहानुभूतिपूर्वक सुनने, भरोसेमंद संबंध स्थापित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता के लिए रेफर करने और फॉलोअप करने के तरीकों की जानकारी दी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव योगिता पारीक ने लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्यों, पैरालीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी), पैनल अधिवक्ताओं, प्राधिकरण के कर्मचारियों, प्रयास संस्थान, गायत्री संस्थान एवं जन साहस संस्था के सदस्यों तथा एम.पी. लॉ कॉलेज के निदेशक, प्रोफेसर और आर.एन.टी. लॉ कॉलेज सहित अन्य प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए दिशा-निर्देश दिए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सदस्यों ने बाल विवाह की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की शपथ ली।