भोपाल। मध्य प्रदेश में उपमुख्यमंत्री एवं आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) दीपम रायचौरा पर एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने का आरोप सामने आया है। ये आरोप दिल्ली में धोखाधड़ी के कई मामलों में आरोपी मोहित गोगिया के दावों से जुड़े बताए जा रहे हैं। कथित तौर पर मामला वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेका आवंटन से संबंधित है। आरोप सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्षों की जानकारी सामने आना बाकी है। वहीं, दीपम रायचौरा ने आरोपों को गलत बताया है।
शराब दुकानों के ठेके के बदले रिश्वत लेने का दावा-
सामने आए दावों के अनुसार, टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों का ठेका दिलाने के बदले कथित तौर पर एक करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। दावा है कि इसमें 50 लाख रुपये नकद और शेष 50 लाख रुपये बैंक ट्रांसफर के माध्यम से दिए गए।
यह भी आरोप लगाया गया है कि नकद राशि दीपक दुबे के जरिए होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्टलेजा के एक फ्लैट से पहुंचाई गई। इसके अलावा दुकानों के आवंटन के लिए कथित तौर पर फर्जी बैंक गारंटी, बैंक एफडी की स्वीकृति में अनियमितताओं और बिना लाइसेंस शराब बिक्री में मदद किए जाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित बैंक रिकॉर्ड, शराब दुकानों के आवंटन से जुड़ी फाइलों और अन्य दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, इन आरोपों के संबंध में किसी जांच के अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
कौन है मोहित गोगिया?
मोहित गोगिया दिल्ली में धोखाधड़ी और जालसाजी के कई मामलों में आरोपी बताया जाता है। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, उसके खिलाफ दिल्ली सहित पंजाब, चंडीगढ़, गोवा और मध्य प्रदेश में भी मामले दर्ज होने का दावा किया गया है।
उस पर बैंक नीलामी और महंगी संपत्तियों के सौदों के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने के आरोप भी बताए गए हैं। उसके खिलाफ दर्ज मामलों और कथित वित्तीय लेनदेन की जांच अलग-अलग स्तरों पर होने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, किसी आरोपी की ओर से लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होते। इन दावों की सत्यता संबंधित दस्तावेजों, स्वतंत्र जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्थापित हो सकती है।
OSD ने आरोपों को बताया गलत-
दीपम रायचौरा पर लगाए गए आरोपों के संबंध में उनका संक्षिप्त जवाब सामने आया है। उन्होंने आरोपों को गलत बताया है। उपलब्ध जानकारी में इस मामले पर आबकारी विभाग या अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।
मामले में आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जांच के दौरान कथित बैंक लेनदेन, एफडी और बैंक गारंटी से संबंधित दस्तावेजों तथा टीटी नगर की संबंधित शराब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया की पड़ताल से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई-
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आरोप आबकारी विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी पर लगाए गए हैं। यदि आरोपों के समर्थन में प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने का प्रश्न उठ सकता है। दूसरी ओर, जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर स्थिति अलग होगी।
फिलहाल, इस मामले में लगाए गए आरोपों और संबंधित अधिकारी के खंडन के बीच वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जांच के निष्कर्ष सामने आने तक आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।