BREAKING NEWS
BIG NEWS : नीमच में मंगलवार को बिजली विभाग का.. <<     BIG NEWS: नशे के कारोबार में फरारी काट रहा था 12.. <<     BIG NEWS : मंदसौर से राजस्थान तक फैला था डोडाचूरा.. <<     KHABAR : एक सुर, एक स्वर और देशभक्ति का संदेश, नीमच.. <<     BIG NEWS : पत्नी के चरित्र पर करता था शक, शराब के नशे.. <<     KHABAR : नगरपालिका के 14 प्रस्तावों पर बीजेपी.. <<     BIG NEWS : हरदीप पुरी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी,.. <<     BIG NEWS : दिल्ली में कांग्रेस की बड़ी आदिवासी.. <<     BIG REPORT : सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पांच.. <<     KHABAR : दीपावली बोनस और लंबित मांगों को लेकर.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     KHABAR : बालाघाट में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई,.. <<     BIG NEWS : गंभीरी नदी के पास खड़े थे तीन युवक, फिर.. <<     BIG VIDEO UPDATE : अफीम किसानों की आखिरी आस अब सांवलिया.. <<     BIG NEWS : तीन प्रमुख सचिव और 16 अफसर होंगे पदोन्नत,.. <<     BIG NEWS : सफाई व्यवस्था को लेकर सख्त हुईं सीएमओ,.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
October 9, 2026, 3:54 pm
KHABAR : मुरैना में फैक्टरियों पर प्रदूषण फैलाने के आरोप, सांक-आसन नदियों के अस्तित्व पर संकट, समाजसेवियों ने उठाई बंद कराने की मांग, पढे़ देवेन्द्र सिंह राजपूत की खबर

Share On:-

मुरैना। मुरैना के बानमोर और सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में संचालित फैक्टरियों से निकलने वाले जहरीले धुएं और औद्योगिक अपशिष्ट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। समाजसेवियों ने आरोप लगाया है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित पानी सांक और आसन नदियों को दूषित कर रहा है। वहीं, फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं के कारण क्षेत्र की आबोहवा पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई गई है। समाजसेवियों ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर दोषी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।


सांक-आसन नदियों को बताया अपनी गंगा-यमुना
समाजसेवी रामचित्र महाना ने कहा कि सांक और आसन नदियां क्षेत्र के लोगों के लिए गंगा-यमुना के समान महत्व रखती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार नदियों की सफाई और स्वच्छता के लिए अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण इन नदियों के प्रदूषित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि फैक्टरियां निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और आवश्यक अनुमतियों के बिना संचालित हो रही हैं, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने औद्योगिक अपशिष्ट के उपचार और भूजल संबंधी अनुमतियों की जांच कराने की मांग की।


इन औद्योगिक इकाइयों पर उठाए सवाल
समाजसेवियों ने सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र की सात्विक एग्रो प्राइवेट लिमिटेड, जायडेक्स केमिकल फैक्ट्री और मयूरी यूनिकॉर्नर्स सहित बानमोर क्षेत्र की श्रीराम ब्रदर्स, मॉडर्न, अंबा शक्ति, शीतल फूड ऑर्गेनिक, बीआर इंडस्ट्रीज, ग्लोबल बायोफ्यूल, एसआरएस और जेएसडब्ल्यू स्टील प्लांट जैसी औद्योगिक इकाइयों की गतिविधियों की जांच की मांग की है। आरोप है कि कुछ फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं और औद्योगिक अपशिष्ट पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, इन इकाइयों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट सामने आना आवश्यक है।


शाम ढलते ही धुएं को लेकर शिकायतें
समाजसेवियों का आरोप है कि बानमोर क्षेत्र में शाम के समय कुछ फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रभावित करता है। उनका कहना है कि वायु प्रदूषण से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रदूषण और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बीच संबंध को लेकर भी चिंता जताई तथा क्षेत्र में वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की।


घड़ियालों की सुरक्षा जरूरी, तो इंसानों की जिंदगी भी अनमोल
रामचित्र महाना ने कहा कि चंबल नदी में घड़ियालों के संरक्षण के लिए रेत खनन पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए जाते हैं। ऐसे में औद्योगिक प्रदूषण से आम लोगों के स्वास्थ्य और नदियों के अस्तित्व पर पड़ने वाले संभावित खतरे को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट उपचार संयंत्रों, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और जरूरी अनुमतियों की तत्काल जांच कराई जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित फैक्टरियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जरूरत पड़ने पर उनका संचालन बंद कराया जाए।


गौरव चतुर्वेदी बोले- प्रदूषण फैलाने वालों पर हो कार्रवाई
समाजसेवी गौरव चतुर्वेदी ने भी औद्योगिक प्रदूषण को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि चंबल अंचल की आबोहवा को दूषित करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई उद्योग नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। जब क्षेत्र के लोग प्रदूषण को लेकर शिकायतें कर रहे हैं, तो उनकी समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हो रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से पारदर्शी जांच कराने और आम लोगों को प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कार्रवाई की जानकारी देने की मांग की।


अब बड़ा सवालः क्या जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग बानमोर एवं सीतापुर औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्टरियों की जांच कर सांक-आसन नदियों और क्षेत्र की आबोहवा को लेकर उठ रही शिकायतों का समाधान करेंगे? स्थानीय लोगों को अब प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE