नीमच। आमजन को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जिले में लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देशन में जनवरी से सितंबर 2026 तक खाद्य सुरक्षा टीम ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक निरीक्षण और नमूना संग्रहण किया। इस दौरान 299 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 263 विधिक तथा 475 निगरानी नमूने लिए गए। अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की गई।
निर्धारित लक्ष्य से अधिक निरीक्षण और नमूने-
नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश तथा जिला प्रशासन के निर्देशन और अभिहित अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश प्रसाद के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा टीम ने जनवरी से सितंबर 2026 तक 180 के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 299 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इसी अवधि में 180 के लक्ष्य के विरुद्ध 263 विधिक नमूने और 270 के लक्ष्य के मुकाबले 475 निगरानी नमूने लिए गए। इनका उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचना और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की निगरानी करना रहा।
12 प्रतिष्ठानों पर बंद करने की कार्रवाई-
जिला प्रशासन की टीम के साथ की गई कार्रवाई में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर 12 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस अथवा पंजीयन निलंबित कर उन्हें बंद कराया गया। इनमें अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों का निर्माण, एक्सपायरी तिथि के बाद खाद्य सामग्री का निर्माण, भंडारण या विक्रय तथा बिना खाद्य पंजीयन के कारोबार जैसी अनियमितताएं शामिल थीं।
इसके अलावा, निरीक्षण के दौरान कमियां और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 89 खाद्य प्रतिष्ठानों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 के तहत सुधार सूचना पत्र जारी किए गए।
जांच रिपोर्ट में 31 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे-
राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल से प्राप्त 88 जांच रिपोर्टों में 31 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें एक नमूना असुरक्षित, 13 अवमानक, तीन अवमानक एवं मिथ्याछाप, तीन मिथ्याछाप तथा दो अपद्रव्य पाए गए। इसके अतिरिक्त, लेबल संबंधी गैर-अनुपालना रिपोर्ट के आधार पर नौ नमूने मिथ्याछाप पाए गए।
जांच में अवमानक और मिथ्याछाप पाए गए खाद्य पदार्थों में घी, मिश्रित दूध, दही, पनीर, मैथीदाना, धनिया, कलौंजी, मिठाइयां और टोंड मिल्क शामिल हैं। घी का एक नमूना असुरक्षित पाया गया। इन मामलों में संबंधित कारोबारियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
29 मामलों में 14.8 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना-
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत वर्ष 2026 में न्यायालय में 26 नए प्रकरण प्रस्तुत किए गए। वहीं, पूर्व में दर्ज प्रकरणों में से 29 मामलों में न्यायालय ने आरोपियों पर 14.8 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया। इनमें से 8.7 लाख रुपये शासन के निर्धारित मद में जमा कराए जा चुके हैं।
लाइसेंस और पंजीयन से 26 लाख रुपये से अधिक राजस्व-
जनवरी से सितंबर 2026 तक खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत जारी लाइसेंस और पंजीयन से प्राप्त 26 लाख रुपये से अधिक की राशि शासन के निर्धारित मद में जमा कराई गई।
आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा पर जोर-
खाद्य सुरक्षा संबंधी कार्रवाई का उद्देश्य मिलावट पर अंकुश लगाने के साथ बाजार में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। नियमित निरीक्षण, नमूनों की जांच और नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई से खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा संबंधी निरीक्षण और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। किसी भी प्रतिष्ठान में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।